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'थियेटर में ही मंडराती रहेगी मेरी आत्मा'

Sun, 27 Apr 2014 09:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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बॉलीवुड अभिनेता एवं मशहूर रंगकर्मी नसीरू द्दीन शाह फिल्मों के बजाय थियेटर के अभिनय में ही अधिक संतोष पाते हैं। शाह का कहना है कि जब शरीर नहीं रहेगा तो भी उनकी आत्मा थियेटर में ही मंडराती रहेगी।
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नौजवानों के मिजाज की फिल्में 63 साल की उम्र में करने के सवाल पर नसीरूद्दीन बोले कि उनसे ‘डेढ़ इश्किया’ फिल्म कभी भी जवानी में नहीं हो पाती। हर चीज का एक वक्त होता है।

शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में अपने नाटक ‘इस्मत आपा के नाम’ की रिहर्सल से पूर्व शुक्रवार दोपहर को विशेष बातचीत में नसीरूद्दीन शाह ने शिमला के नैसर्गिक सौंदर्य की जमकर तारीफ की।
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40 साल में बहुत कम बदला है शिमला

उनकी पत्नी रत्ना पाठक शाह उनके साथ थीं। नसीरूद्दीन शाह बोले, वह इससे पहले केवल एक बार 1974 में शिमला आए थे। आज 40 साल बाद आया तो शिमला को बहुत कम बदला पाया है।

कई हिल स्टेशन विकास की अंधी दौड़ में बर्बाद हुए हैं, मगर शिमला को जिस तरह से प्रिजर्व कर रखा गया है, वह अच्छा है।

फिल्मी सितारों का थियेटर से वास्ता न होने को लेकर नसीरूद्दीन शाह ने कहा कि फिल्मों और थियेटर का एक-दूसरे से ज्यादा लेना-देना नहीं। दोनों एकदम अलग विधाएं हैं।

इसके बावजूद अनुपम खेर, परेश रावल जैसी बहुत सी शख्सियतें फिल्मों के अलावा थियेटर से भी बराबर जुड़ी हुई हैं। यह जरूर है कि फिल्मों में आ रही नई पीढ़ी के कलाकारों का रंगमंच से कोई खास वास्ता नहीं रह गया है।
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