अच्छी फिल्म अपना रास्ता खुद बना लेती है। फिल्म लाल सिंह चड्डा के बायकॉट को लेकर पूछे सवाल पर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने यह तर्क दिया। अनुपम खेर प्रेस से शिमला में मिलिए कार्यक्रम में शामिल हुए। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की टारगेट किलिंग को लेकर अनुपम खेर ने कहा कि यह 50 सालों से हो रहा है। इसे खत्म करने के लिए आतंकवाद खत्म होना चाहिए। कुछ ने कहा था कि कश्मीर फाइल्स आने के बाद यह फिर से बढ़ा है, लेकिन अब कश्मीरी पंडित ही नहीं, बल्कि मुसलमानों भाइयों और बहनों की हत्या भी हो रही है।
अनपुम ने बताया कि फिल्म अच्छी होगी तो बायकॉट से फर्क नहीं पड़ता, हो सकता है पांच फीसदी लोगों को फिल्म पसंद नहीं आई होगी, लेकिन 95 फीसदी लोग फिल्म देखने गए हैं, उन्होंने बाहर आकर बोला होगा कि फिल्म अच्छी है। लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी है। कुछ लोगों को लगा होगा कि बायकॉट करना चाहिए। मेरी कुछ फिल्मों को भी बायकॉट किया गया। आमिर खान ने 2015 में इन टॉलरेंस को लेकर बयान दिया, लेकिन उनकी फिल्म दंगल और पीके चल पड़ी। दुनिया में हिंदुस्तान से ज्यादा टॉलरेंस कोई नहीं है। आमिर खान की बतौर एक्टर इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी अच्छी फिल्म एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर नहीं चली। हालांकि कश्मीर फाइल चली है। उन्होंने कहा कि मनोरंजन को लेकर जनता जागरूक हो गई है।
अमिताभ बच्चन बोले थे, आप खुशकिस्मत
अनुपम खेर से जीवन में विफलता को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि वे विफलता को सफलता में बदलना जानते हैं। परिजनों ने हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ाया था। जब फिल्मों में काम किया अच्छी हिंदी बोलने के कारण एक बार बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा था कि अनुपम आप खुशकिस्मत हैं कि आपके मां बाप ने आपको हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ाया।
फौजी के किस्से को सुनाया
अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने शाही थियेटर में दो बदन फिल्म देखी थी। उस दौरान टिकट की खिड़की बंद होती थी और लाइन लगती थी। खिड़की के खुलने पर लाइन टूट जाती थी। इस बीच एक फौजी फिल्म देखने आया। भीड़ में फौजी ने खिड़की पर हाथ रख दिया तो टिकट वाले ने कहा कि घबरा क्यों रहा है, इस पर फौजी ने उसे जमीन से दो इंच हवा में उठा दिया और कहा कि गोली से नहीं घबराया तो तेरे से क्या घबराऊंगा।
व्यक्तिगत तौर पर राहुल गांधी के खिलाफ नहीं
खेर ने कहा कि राहुल गांधी की बातें सुनकर मुझे अगर यह लगेगा कि यह देश के बारे में कितने न्योछावर हैं और देश के बारे में कितने चिंतित हैं तो मुझे अच्छा लगेगा। मन में सोचकर कुछ नहीं होगा। मैं व्यक्तिगत तौर पर किसी के खिलाफ नहीं हूं, मगर देश प्रेम एक्शन में होना चाहिए, अभिनय में नहीं।
शिमला ने मुझे मासूमियत और मेहनत करना सिखाई : खेर
अनुपम खेर ने कहा कि शिमला शहर ने मुझे मासूमियत और मेहनत करना सिखाई। इसी शहर से मैंने गिरकर उठना सीखा है। अपने दादा की बात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब इंसान गरीब होता है तो खुशी ही उसकी सबसे बड़ी अमीरी होती है। अगर इंसान के हौसले बुलंद हों तो उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। मीडिया से बातचीत के दौरान खेर ने बचपन से जुड़े किस्से और बॉलीवुड के सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने मोदी के देश में किए अच्छे कामों और हर घर तिरंगा अभियान की सराहना की।
सीएम जयराम ने मिले अभिनेता अनुपम खेर
उधर, देर शाम अभिनेता और पदम भूषण पुरस्कार से सम्मानित अनुपम खेर ने शिमला के ओकओवर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। यह शिष्टाचार भेंट थी।