हिमाचल में इस बार भाजपा के संगठनात्मक चुनाव को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। ये चुनाव ही प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की तस्वीर को साफ करेंगे। जिस गुट के हाथ में पार्टी की कमान होगी, उसी की सीएम पद के लिए दावेदारी भी पुख्ता होगी।
टिकट आवंटन एवं मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की चयन प्रक्रिया में प्रदेशाध्यक्ष की भी भूमिका रहती है। यही कारण है कि संगठनात्मक चुनाव का ऐलान होते ही ओहदेदारी के लिए जोड़तोड़ अभी से शुरू हो गई है। शांता और धूमल के अतिरिक्त इस बार जेपी नड्डा गुट भी अंतर खाते सक्रिय हो गया है। भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष 3 साल के लिए चुना जाना है। इसी दौरान विधानसभा के चुनाव भी होने हैं।
तय शेड्यूल के अनुसार 20 सितंबर तक बूथ, 10 अक्तूबर तक मंडलों एवं 30 अक्तूबर तक जिला के चुनाव होने हैं। पार्टी का दावा है कि 20 नवंबर तक प्रदेशाध्यक्ष तय हो जाएगा। इसी बीच बूथ कमेटियों में ही अपने लोगों को शामिल करने के लिए ओहदों के तलबगार सक्रिय हो गए हैं।
मंडलों और जिलों के लिए समीकरण बनाने में नेता जुट गए हैं। प्रदेशाध्यक्ष के लिए बड़े नेता आरएसएस और दिल्ली दरबार तक लॉबिंग कर रहे हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के लिए सांसद रामस्वरूप, राजीव बिंदल, सुरेश भारद्वाज, रणधीर शर्मा, सतपाल सिंह सत्ती और विपिन परमार आदि के नाम चल रहे हैं। जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों का हवाला देकर एक गुट इस बार महिला नेत्री का नाम भी विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
बिंदल, परमार और रणधीर हैं भाजपा के महामंत्री- वर्तमान में राजीव बिंदल, विपिन परमार और रणधीर शर्मा प्रदेश भाजपा में महामंत्री हैं। सुरेश भारद्वाज और जयराम ठाकुर पहले पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। सतपाल सिंह सत्ती वर्तमान में अध्यक्ष हैं। रामस्वरूप शर्मा वर्तमान में मंडी से सांसद हैं और संगठन में लंबे समय से काम कर रहे हैं।