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वीरभद्र संपत्ति मामले को लेकर फिर हंगामा, भाजपा का वाकआउट

Wed, 30 Mar 2016 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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भाजपा ने प्रश्नकाल में लंबे समय तक नारेबाजी की। इसके बाद सदन से वाकआउट किया। - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ चल रहे संपत्ति मामले के बीच दस्तावेजों से छेड़खानी करने के आरोप लगाते हुए भाजपा मंगलवार को मामले पर चर्चा पर अड़ी रही। भाजपा ने प्रश्नकाल में लंबे समय तक नारेबाजी की। इसके बाद सदन से वाकआउट किया। विपक्ष के नियम 67 में मांगी गई चर्चा के नोटिस को स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने खारिज किया।
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इसका भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध किया और नारेबाजी करते हुए सीटों पर खड़े हो गए। इससे प्रश्नकाल बाधित रहा। बाद में वे सदन से बाहर चले गए। जब यह हंगामा हुआ, तब मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। वे अपने विस परिसर स्थित कार्यालय में ही थे।

नौ दिन बाद सोमवार को शुरू हुए विधानसभा के बजट सत्र में भाजपा विधायकों ने मंगलवार को भी वाकआउट किया। विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्रश्नकाल शुरू होने से पहले ही ये मामला उठाया कि उन्होंने विस अध्यक्ष को नियम 67 के तहत एक नोटिस दिया है। इसमें मीडिया में आई एक रिपोर्ट पर चर्चा मांगी है।
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सीएम पर लगे रिपोर्ट में छेड़खानी के आरोप

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो
रिपोर्ट के मुताबिक सीएम की ओर से संपत्ति मामले में पेश किए गए दस्तावेजों में छेड़खानी की गई है। स्पीकर मामले को अर्द्धन्यायिक बताते रहे और इस बारे में चर्चा को नामंजूर किया। बाद में भाजपा विधायक नारेबाजी करते रहे। 11 बजे शुरू हुई सदन की बैठक में विधायकों की नारेबाजी के बीच प्रश्नकाल को शुरू किया जा सका।

बीच में नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने कहा कि सारी चर्चा सदन से बाहर होती रही है। सीएम खुद बाहर बयान दे रहे हैं। इसे सदन के भीतर करवाने में क्या दिक्कत है, मगर स्पीकर ने इसे मंजूर नहीं किया।

प्रश्नकाल खत्म होने से पहले ही भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। संसदीय कार्य मंत्री का कार्यभार देख रहे परिवहन मंत्री जीएस बाली सदन में सरकार का पक्ष लगातार उठाते रहे।
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55 करोड़ पौधे लगाने को लेकर पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक

वन एवं वन्य जीवन शीर्ष के अंतर्गत कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वन मंत्री और विपक्ष के विधायकों में जमकर नोकझोंक हुई। - फोटो : फाइल फोटो
विपक्ष की ओर से विधानसभा में लाए गए वन एवं वन्य जीवन शीर्ष के अंतर्गत कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वन मंत्री और विपक्ष के विधायकों में जमकर नोकझोंक हुई। विधायकों का आरोप था कि सरकार ने तीन साल में करीब 55 करोड़ पौधे प्रदेश में लगाने का दावा किया है। यह कागजी दावा न तो धरातल पर है और न ही विभाग की वेबसाइट पर।

उनका कहना था कि वन मंत्री 55 करोड़ पौधे लगाने को खरीद की जानकारी, रकम और अन्य जानकारी नहीं दे पा रहे। जवाब में वन मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश भर में पौधरोपण किया है। बंदरों, जंगली जानवरों के आतंक को लेकर सरकार चिंतित है। यही कारण है कि आधुनिक तरीकों के जरिये बंदरों की नसबंदी की जा रही है।

सरकार विपक्ष के जंगल में नसबंदी करने के केंद्र बनाने के सुझाव पर गौर करेगी। उन्होंने मिड हिमालयन प्रोजेक्ट की राशि के दुरुपयोग की जांच की बात कही। कहा कि बंदरों को पकड़ने वालों को पेमेंट देने के लिए फील्ड अफसरों की रिपोर्ट ली जाती है।

नहीं कटेंगे सेब के पेड़, होगी प्रूनिंग
वनों में अतिक्रमण के मामले में उन्होंने साफ किया कि अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद वन भूमि पर लगे सेब के पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। ठाकुर सिंह भरमौरी ने बताया कि वन क्षेत्र में अवैध तरीके से सेब के बाग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे।

पेड़ों में लगे फल और हरे पेड़ न काटने को सरकार जब कोर्ट गई तो आदेश हुए कि अब सरकार उन पेड़ों को अपने अधीन ले लेगी और उनमें लगने वाले फलों को बेचकर सरकार के खजाने में जमा किया जाएगा। इसके लिए उनकी फेंसिंग भी की जाएगी।
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