बरठीं में आयोजित बैठक में पहुंचे सात ग्राम पंचायतों के भाजपा कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के गृह विधानसभा क्षेत्र झंडूता में नाराज कार्यकर्ताओं के विरोध के स्वर और तेज हो गए हैं। विरोध के इन स्वरों की गूंज रविवार को बरठीं के खरोटा माता मंदिर में हुई पुराने कार्यकर्ताओं की बैठक में सुनाई दी। इस बैठक में सात ग्राम पंचायतों के करीब 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और पूर्व मंत्री दिवंगत रिखी राम कौंडल के बेटे राजकुमार कौंडल को 2022 में विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में उतारने के लिए रणनीति बनाई।
झंडूता में पुराने कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने पार्टी के लिए पूरी जिंदगी लगा दी। लेकिन वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र और पार्टी में उनका कोई अस्तित्व नहीं है। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए लोगों को पद और सम्मान दोनों दिया जा रहा है। वहीं, जिला में भाजपा के बागियों पर अंकुश लगाने के लिए और रूठों को मनाने की जिला प्रभारी एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर की कोशिश भी नाकाम रही। बैठक में राजकुमार कौंडल ने मोदी और सरकार की योजनाओं की जमकर तारीफ की।
जुब्बल-कोटखाई में भाजपा प्रभारी के सामने गुटबाजी
अर्की के बाद जुब्बल-कोटखाई में प्रभारी के सामने भाजपा में गुटबाजी मुखर हुई है। चेतन बरागटा के अलावा टिकट के अन्य दावेदार प्रदेश भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना से मिलने नहीं पहुंचे। कई दिनों से चेतन बरागटा के समानांतर अपने लिए वोट मांग रही नीलम सरैक ने रविवार को मंडल की बैठक में शामिल होने या प्रभारी के स्वागत कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। यहीं नहीं, सुशांत देष्टा, प्रज्जवल बस्टा जैसे टिकट की रेस में शामिल अन्य नेता भी कहीं नजर नहीं आए।
उपचुनाव से पहले अर्की में पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा और उनके समर्थक खुलेआम पिछले विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी रहे रतन पाल सिंह को टिकट नहीं देने के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे हैं। इसी तरह से अब जुब्बल-कोटखाई में भी पूर्व मंत्री स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा के समानांतर टिकट मांगती रही नीलम सरैक अपने दावेदारी को लेकर बहुत सक्रिय हो गई हैं। हालांकि, नीलम से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वह एक संबंधी का देहांत होने पर वहां गई थीं। रविवार को हुई मंडल की बैठक या प्रभारी के दौरे के दौरान उन्हें बुलाया भी नहीं गया था।