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72 घंटे से टनल में फंसे मजदूर, सेना-एनडीआरएफ ने खींचे हाथ

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हिमाचल के बिलासपुर में फोरलेन सड़क की निर्माणाधीन टनल-4 धंसने से इसके बीच फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के अब तक के तमाम प्रयास नाकाम रहे हैं। वेस्टर्न कमान चंडी मंदिर से आई सेना और बठिंडा की एनडीआरएफ की टीमों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। बीआरओ की अगुवाई में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहतरीन बनाते हुए दोनों टीमें लौट गई हैं।
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हालांकि, टनल और टनल के ऊपर की पहाड़ी पर चल रही ड्रिलिंग से रास्ता खुलने के बाद टीम को पुन: बुलाया जा सकता है। बिलासपुर के टीहरा में धंसी टनल में 72 घंटे से तीन मजदूर फंसे हुए हैं। उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका है। प्रशासन ने पूरा तंत्र मजदूरों तक पहुंचने के लिए लगाया हुआ है।

सोमवार रात को ही एनडीआरएफ और सेना की टीम टनल में पहुंची। घंटों जायजा लेने के बाद दोनों ही टीमों ने मजदूरों को निकालने के लिए बीआरओ की अगुवाई में चल रहे ऑपरेशन को ही बेहतरीन बताया है।
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ड्रिलिंग पूरी होने के बाद अंदर घुसेंगे सैनिक

72 घंटे से टनल के घुप अंधेरे में फंसे मजदूरों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता अब पहाड़ को भेदकर बनाया जा रहा होल (छेद) है। टनल के ऊपर पहाड़ी पर ड्रिलिंग मशीन लगाकर छेद किया जा रहा है। जिसके जरिये टनल के बीच फंसे मजदूरों तक पहुंचने के प्रयास किए जाएंगे। 1.3 मीटर घेरे वाले इसी सुराग से टनल में फंसे मजदूरों से कम्यूनिकेशन हो सकेगा। सैनिक भी इसी छेद के जरिये टनल तक पहुंच सकेंगे।

मौके का जायजा लेने पहुंचे एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि पहला प्रयास मजदूरों के साथ कम्यूनिकेशन का है। बीआरओ की अगुवाई में चल रहे ऑपरेशन के तहत टनल के जिस हिस्से में मजदूर फंसे हैं, वहां तक पहुंचने के लिए दो विकल्प हैं। एक टनल के अंदर गिरे मलबे में की जा रही इमरजेंसी टनल बोरिंग। दूसरा, पहाड़ी के ऊपर ड्रिलिंग मशीन से किया जा रहा छेद।

यह दोनों कार्य पूरे होने के बाद सेना या एनडीआरफ के जवान भीतर प्रवेश कर सकेंगे। उनके अनुसार रस्सी के सहारे टनल के ऊपर पहाड़ी से टनल तक बनाया जा रहा छेद टनल में फंसे मजदूरों तक पहुंचने का आसान रास्ता हो सकता है।

मजदूरों के परिजनों ने छोड़ा खाना

वहीं, टनल के अंदर फंसे जिला मंडी के दो मजदूरों को बाहर निकालने की सारी कोशिशें फेल होने से परिजनों की आस भी टूट रही है। करेरी गांव के मणिराम की पत्नी जैयदासी और माता बोधी देवी ने घटना के बाद से खाना तक नहीं खाया। पानी के घूंट पीकर मणिराम के सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद लगा रखी है।

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के लिए बिलासपुर के टीहरा में बन रहे टनल में मलबा गिरने से जिला मंडी के मणिराम और ह्दय राम अंदर फंसे है। 72 घंटे बाद भी प्रशासनिक और कंपनी प्रबंधन की मशीनरी टनल के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर नहीं निकाल पाए। मणि राम और ह्दय राम के परिजनों की उम्मीदें भी टूटती जा रही है।

मंगलवार को मणि राम का बेटा दिनेश कुमार बिलासपुर से वापस घर लौटाया है। जबकि पिता शुकरू राम अभी भी बेटे के टनल से बाहर निकलने की आस में घटनास्थल पर डटे हैं। सराज कांग्रेस के महासचिव शेष राम मंडयाल ने बताया कि मणिराम उनका सहपाठी है और बहुत ही ईमानदार व सरल स्वाभाव का है।

सतीश की दादी ने नहीं छोड़ी आस

शनिवार से टीहरा टनल में फंसे सतीश तोमर की दादी को भगवान और रेस्क्यू टीम पर पूरा भरोसा है। कीरतपुर नेरचौक फोरलेन एक्सप्रेस हाईवे टनल में फंसे तीन मजदूरों में से एक टारू गांव का सतीश भी हैं। घर में सतीश की बहनों और मां का सब्र टूटता जा रहा है। हालांकि, मुश्किल की इस घड़ी में परिजनों ने भगवान और रेस्क्यू टीम से उम्मीद नहीं छोड़ी है।

‘अमर उजाला’ टीम ने मंगलवार को सतीश तोमर की दादी बिशनी देवी (75) से बात की। दादी ने हौसला दिखाते हुए कहा कि अब तक बचाव टीम को सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन भगवान व रेस्क्यू टीम पोते को सुरक्षित बाहर निकालेगी।  दृढ़ विश्वास मन में है। दादी को अपने पोते के सुरक्षित रहने का यकीन है। बिलासपुर के टीहरा से दलीप तोमर व अनिल तोमर मोबाइल पर सूचना दे रहे हैं।

मंगलवार शाम तक भी बाहर निकालने में कामयाबी नहीं मिलने से परिजन चिंतित  है। लेकिन, 75 वर्षीय बुजुर्ग दादी पूरे परिवार को भगवान पर भरोसा व दम रखने की प्रेरणा दे रही हैं। अपने बेटे श्याम सिंह तोमर (52) व बहू गीता देवी पोती वीना व रीना को भी चिंता नहीं करने को कह रही है।

टनल हादसे में प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो : धूमल

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेमकुमार धूमल ने टनल हादसे में तीन मजदूरों के फंसे होने पर चिंता व्यक्त की है और उनकी कुशलता की कामना की है। कहा कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। एनडीआरएफ की टीम के अतिरिक्त अगर प्रशासन को लगता है कि सेना की मदद की आवश्यकता है तो इसके लिए सेना की मदद लेनी चाहिए।

इस सारे हादसे की जांच होना जरूरी है। जांच के दायरे में कंपनी की तकनीकी लापरवाही के अतिरिक्त प्रशासनिक जवाबदेही की भी जांच की जानी आवश्यक है। धूमल ने कहा कि इस नेशनल हाइवे के कार्य में लगी मुख्य कंपनी स्वयं काम न करके सबलैटिंग के माध्यम से कार्य करवा रही है और सबलैटिंग के चलते छोटी कंपनियां मुनाफा कमाने की चाहत में सुरक्षा मानकों पर ध्यान नहीं दे रही हैं।

इस गलत आवंटन की वजह से इस तरह के हादसे हो रहे हैं और साथ ही इस नेशनल हाइवे के निर्माण में अनावश्यक देरी हो रही है। धूमल ने कहा कि हमारी आदत सी हो गई है कि किसी भी हादसे के बाद जांच के आदेश तो दे दिए जाते हैं, मगर जांच के परिणामों का क्या होता है, किसी को मालूम नहीं होता है। प्रदेश सरकार को पूर्व की परिपाटी से हटते हुए इस मामले की गंभीरता जांच करनी चाहिए।
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आज सड़कों पर उतरेगी सीटू

वहीं, टनल के घुप अंधेरे में फंसे मजदूरों की जिंदगियों को बचाने के लिए चल रहे बचाव कार्यों से असंतुष्ट सीटू प्रदेश भर में सरकार और कंपनी के खिलाफ हल्ला बोलेगी। 16 सितंबर को सीटू जिला मुख्यालयों में सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी। सीटू ने चेतावनी दी है कि अगर टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए प्रयास तेज नहीं किए गए, तो फोरलेन में सभी निर्माण कार्य ठप कर दिए जाएंगे।

सीटू महासचिव डा. कश्मीर सिंह ठाकुर और जिला सचिव लखनपाल शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि 65 घंटे तक टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए एनडीआरएफ और सेना की सेवाएं काफी देर से ली गई। फोरलेन निर्माण कंपनी द्वारा जिस घटिया तरीके से टनल का निर्माण किया जा रहा है, उससे काफी बड़ा हादसा हो सकता है।

कंपनी ने टीहरा में अभी तक करीब 280 मीटर टनल बनाई गई है, जिसमें से करीब 55 मीटर टनल में कोई (रिब्स) लोहे के चैनल नहीं लगाई गई है। जहां टनल में मलबा गिरा है, वहां पर भी कोई रिब्स नहीं लगी थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कंपनी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कितनी लापरवाही बरत रही है।
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