कालीबाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं को दिया जा चरणामृत और प्रसाद, घंटियां बजना शुरू
तारादेवी मंदिर में भंडारे की नौ साल की बुकिंग पेंडिंग
2013 में बुकिंग करवाने वाले ही लगा सकेंगे भंडारा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला के मंदिरों में कोरोना के चलते लगाई गई बंदिशों को हटा दिया गया है। कालीबाड़ी मंदिर में अब लोग प्रवेेश पाते ही जहां घंटी बजा रहे हैं वहीं उन्हें प्रसाद भी बांटा जा रहा है। दो सालों बाद लोगों को मंदिर में प्रसाद मिलना शुरू हुआ है। शनिवार को भी मंदिर में लोगों ने पूजा अर्चना की तथा मां का प्रसाद पाया।
मंदिरों में भंडारा चखने के लिए श्रद्धालुओं को अभी एक हफ्ता और इंतजार करना होगा। मंदिर कमेटियों का कहना है कि व्यवस्था करने में अभी कुछ वक्त चाहिए। शहर के तारादेवी मंदिर में भंडार लगाने को लेकर इतनी बुकिंग है कि अभी 2013 में बुकिंग करवाने वालों का ही नंबर चल रहा है। मंदिर के ट्रस्टी अनिल ने बताया कि अभी दो सालों से भंडारे की व्यवस्था बंद थी तो ऐसे में भंडारे लगाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। जाखू मंदिर में साल पहले बुकिंग करवाने वाले ही अभी भंडारे लगा सकेंगे।
कालीबाड़ी मंदिर कमेटी के सचिव सोमनाथ प्रमाणिक ने बताया कि मंदिर में केवल नवरात्रि पर ही भंडारा दिया जाता है। मंदिर में जो लोग दर्शनों के लिए आएंगे उन्हें मंदिर में प्रसाद बांटा जाएगा और घंटियां बजाने दी जाएंगी। इस दौरान शहर के सभी मंदिरों में कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाएगा।
27 फरवरी से शुरू हो सकते हैं भंडारे
जाखू, तारादेवी और संकटमोचन मंदिर में 27 फरवरी से भंडारे की शुरुआत हो सकती है। मंदिर कमेटी के सदस्यों का कहना है कि प्रशासन की ओर से तय गाइड लाइन आने के बाद ही व्यवस्था सुचारु तरीके से शुरू की जाएगी। कोरोना के चलते दो सालों से मंदिरों में भंडारे, प्रसाद बांटने और घंटियां बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध था। अब कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद जिला प्रशासन ने बंदिशों को हटा दिया है। बताया कि जो भक्त मंदिर में दर्शनों के लिए आ रहे हैं उन्हें प्रसाद बांटा जा रहा है। जाखू मंदिर में आज भंडारे का भोग भगवान हनुमान जी को चढ़ेगा लेकिन लोगों को नहीं बांटा जाएगा।