धर्मशाला में प्रेस वार्ता के दौरान बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर।
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बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर ने कहा कि मैच फिक्सिंग बीसीसीआई के अधिकारी नहीं, बल्कि खिलाड़ी करते हैं। बीसीसीआई अधिकारियों ने ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ हमेशा कड़े कदम उठाए हैं। ऐसे में एक या दो खराब घटनाओं के कारण पूरी संस्था का चेहरा काला कर देना गलत है। अनुराग धर्मशाला में प्रेस वार्ता के दौरान लोढा कमेटी की रिपोर्ट के प्रश्न पर बोल रहे थे।
कहा कि लोढा कमेटी की रिपोर्ट का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए, इस पर ज्यादा कहना उचित नहीं होगा। अगर कहा जाए कि बड़ी संस्थाएं सोसाइटी एक्ट छोड़ दें, कंपनी एक्ट छोड़ दें और उससे ऊपर उठकर कुछ भी लागू कर दें तो यह सही नहीं होगा। कई जगह कुछ संस्थाओं में कमी भी आती है, लेकिन यह कहना कि बीसीसीआई ने आज तक कुछ किया ही नहीं, यह उचित नहीं है। आप कहते हैं खिलाड़ी के हाथ में सब कुछ दे दो तो मैच फिक्सिंग कौन करता है।
मैच फिक्सिंग कोई अधिकारी नहीं करता। जो कोई खिलाड़ी खेलता है, उसके कारण कभी न कभी ऐसा हुआ होगा। उसके खिलाफ उचित समय पर कदम हमेशा अधिकारी ने ही उठाया है। बड़े से बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ बीसीसीआई ने कदम उठाए हैं। पिछले एक वर्ष में खेल में पारदर्शिता लाने को कड़े सुधार लाए गए हैं। हमारी जॉब आनरेरी है, लेकिन अब तो यह लगना शुरू हो गया है कि दिस इस आनरेरी जॉब बिदाउट ऑनर।
महाराष्ट्र में सूखे के दौरान आईपीएल मैच के लिए पानी के मामले को तूल देने के लिए अनुराग ने मीडिया पर आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया। कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि महाराष्ट्र में मैच नहीं होने से 100 करोड़ का नुकसान होगा। मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
कहा कि महाराष्ट्र में मैच करवाने के लिए बीसीसीआई पीने के पानी यानी किसी तरह के पोर्टबल पानी का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं है। बीसीसीआई मैच के लिए सीवेज ट्रीटेट पानी का इस्तेमाल करेगा। इससे किसी को कोई नुकसान नहीं है। बीसीसीआई ने क्या महाराष्ट्र के सूखे से प्रभावित किसानों के बारे में भी कुछ सोचा है, के प्रश्न पर अनुराग ने कहा कि किसानों के बारे में बीसीसीआई तो क्या पूरे देश को सोचना चाहिए।