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महाभारत काल की इस युद्ध शैली में जमकर चलते हैं तीर, मेले में हुआ शानदार प्रदर्शन

Sun, 23 Jun 2019 11:47 AM IST
Krishan Singh सतवीर सिंह, अमर उजाला, सोलन
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शूलिनी मेले में ठोडा खेलते खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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महाभारत काल की युद्ध शैली को शिमला संसदीय क्षेत्र में दूरदराज के ग्रामीणों ने ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है। सोलन में मां शूलिनी मेले के दौरान शनिवार को इस नृत्य का ठोडो मैदान में प्रदर्शन किया गया।

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इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। विशेष लिबास पहने ठोडा के खिलाड़ियों ने न सिर्फ विरोधी आक्रमण को झेला बल्कि धनुष और वाण से उसका जवाब भी दिया। ठोडा नृत्य के इस युद्ध में थककर बाहर होने वाले को हारा हुआ माना गया।

आखिर में जिस टीम के सबसे ज्यादा खिलाड़ी मैदान में रहे, उन्हें जीत का पुरस्कार दिया गया। शिमला, सोलन व सिरमौर से ठोडा नृत्य में चार टीमों ने भाग लिया।
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खेल की शुरूआत से पहले सभी खिलाड़ियों ने मैदान में नाटी प्रस्तुत कर दर्शकों को खूब मनोरंजन किया। बघाट बैंक के अध्यक्ष पवन गुप्ता विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। नृत्य में सिरमौर, चौपाल, शिलारू, शिमला पीरन की टीमों ने भाग लिया।

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ये है खेल के नियम

- फोटो : अमर उजाला
 जैसे ही खिलाड़ी मैदान में पहुंचे तो ठोडो नृत्य और खेल में रुचि रखने वाले लोगों की भीड़ मैदान में जुट गई। घुटने से नीचे तीर को मारने का खेल खेला गया। 
जानकारी के अनुसार तीर कमान के इस खेल में पाशी और शाठी के दो दल एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं।

यह खेल सतयुग से खेला जा रहा है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुका है। इस खेल में प्रयोग किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है।

खेल में पैर में पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है। इस दौरान मैदान में खिलाड़ियों में ठोडा खेलने के लिए काफी उत्साह रहा। पूरा दिन ठोडा खेल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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