जैसे ही खिलाड़ी मैदान में पहुंचे तो ठोडो नृत्य और खेल में रुचि रखने वाले लोगों की भीड़ मैदान में जुट गई। घुटने से नीचे तीर को मारने का खेल खेला गया।
जानकारी के अनुसार तीर कमान के इस खेल में पाशी और शाठी के दो दल एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं।
यह खेल सतयुग से खेला जा रहा है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुका है। इस खेल में प्रयोग किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है।
खेल में पैर में पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है। इस दौरान मैदान में खिलाड़ियों में ठोडा खेलने के लिए काफी उत्साह रहा। पूरा दिन ठोडा खेल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।