आईबैक्स लाहौल में 10,000 हजार फुट से अधिक ऊंचाई पर पाए जाते हैं। हाल ही में जिस्पा के समीप लोगों ने आईबैक्स के झुंड को सड़क के साथ लगते रिहायशी क्षेत्र के आसपास विचरते हुए देखा। ऐसे में लोग मोबाइल कैमरे में आईबैक्स की तस्वीरें कैद कर रहे हैं। देश-विदेश के पर्यटक दुर्लभ प्रजाति के इन वन्य प्राणियों को देखने के लिए स्पीति का रुख करते हैं। अब अटल टनल रोहतांग बन जाने के बाद लाहौल आने वाले पर्यटक इसे करीब से निहार रहे हैं। बर्फ पिघलने पर आईबैक्स ऊंचाई वाले क्षेत्रों का रुख करेंगे।
साइबेरियन आईबैक्स की मानी जाती है उप प्रजाति
वन विभाग के वन रक्षक एवं वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर शिव कुमार बताते हैं कि हिमालयन आईबैक्स ( टंगरोल) को साइबेरियन आईबैक्स की उप प्रजाति मानी जाती है। यहां वाइल्ड लाइफ टूरिज्म तेजी से विकसित होने की उम्मीद है। लाहौल में आईबैक्स के साथ दुर्लभ प्रजाति के बर्फानी तेंदुए को भी देखा जा सकता है। पिछले करीब एक दशक के भीतर किब्बर वाइल्ड सेंक्चुरी में आईबैक्स की संख्या करीब दोगुना से अधिक बढ़ गई है।
लाहौल में वन्य प्राणियों से कोई छेड़छाड़ नहीं करता है। इसी वजह से आईबैक्स (टंगरोल) निडर होकर रिहायशी क्षेत्रों में नजर आ रहे हैं। वन विभाग की टीम भी निरंतर गश्त कर रही है। -भूपेंद्र पाल, वन परिक्षेत्र अधिकारी, पट्टन