रैली से ठीक एक दिन पहले सोमवार को सीएम ने बाली और सुक्खू से नाराजगी जताई थी।
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राजनीति के रंग भी अजब-गजब हैं। जो नेता एक दिन पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निशाने पर थे, वही दूसरे दिन जनता के बीच सीएम की तारीफ के पुल बांधते नहीं थके। राजनीति की ये तस्वीर मंगलवार को नेहरू मैदान में दिखी।
यहां आयोजित कांग्रेस की रैली में वरिष्ठ मंत्री जीएस बाली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंच से सीएम को अपना प्रेरणास्रोत बताकर उनकी खूबियों को एक-एक कर हजारों में जुटी भीड़ के सामने रखा। रैली से ठीक एक दिन पहले सोमवार को सीएम ने बाली और सुक्खू से नाराजगी जताई थी।
बाली ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री और विद्या स्टोक्स से प्रेरणा मिलती है। वीरभद्र सिंह सातवीं बार सीएम बनते हैं तो भी उनके साथ खडे़ रहेंगे। वीरभद्र के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने सर्वांगीण विकास किया है। ठियोग और रामपुर में विकास हो रहा है तो नगरोटा और कांगड़ा में भी विकास की कमी नहीं।
सुक्खू ने फेंका नहले पर दहला
नहले पर दहला फेंकते हुए सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र हिमाचल को भागों में नहीं बल्कि दिल में देखते हैं।
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नहले पर दहला फेंकते हुए सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र हिमाचल को भागों में नहीं बल्कि दिल में देखते हैं। 18 घंटे लोगों के बीच रहते हैं। वीरभद्र के दिल में दर्द रहता है कि किसी का काम हुआ या नहीं। सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र के नेतृत्व में कांग्रेस 2017 में भी सत्ता में आएगी।
सुक्खू ने हमेशा से सीएम वीरभद्र सिंह के निशाने पर रहने वाले धूमल परिवार पर भी जुबानी हमला बोला। कहा कि अनुराग मुंबई और दुबई में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। वे राजनीति के लिए क्रिकेट का सहारा लेते हैं।
सीएम ने इसलिए जताई थी नाराजगी
बाली ने नगरोटा बगवां में कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी की रैली वीरभद्र सिंह को विश्वास में लिए बगैर तय की। सुक्खू ने वीरभद्र सिंह ब्रिगेड बनाने वाले बलदेव ठाकुर को सस्पेंड कर दिया जबकि दो नेताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।
वीरभद्र की संजीवनी से कांग्रेस खेमों को एक करने के लिए हुई रैली
बेशक वीरभद्र-स्टोक्स में तीन साल से एका चल रहा है, बावजूद इसके ठियोग में कांग्रेस के नेता आज भी वीरभद्र और स्टोक्स खेमों में बंटे हुए हैं।
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सीएम वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में हुई ठियोग रैली के बहाने स्टोक्स समर्थकों ने जहां अगले चुनाव के लिए टिकट के नए तलबगारों को ये संदेश देने का प्रयास किया है कि अभी स्टोक्स ने ठियोग में चुनावी मैदान छोड़ने का मन नहीं बनाया है, वहीं इसे ठियोग कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिश भी माना जा रहा है।
बेशक वीरभद्र-स्टोक्स में तीन साल से एका चल रहा है, बावजूद इसके ठियोग में कांग्रेस के नेता आज भी वीरभद्र और स्टोक्स खेमों में बंटे हुए हैं। इसे ठियोग में अपने विरोधी पूर्व विधायक राकेश वर्मा के बढ़ते रसूख को कम करने का स्टोक्स का एक प्रयास भी माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव में पांच में से तीन जिला परिषद वार्ड सदस्यों और बीडीसी चेयरमैन पद पर पूर्व विधायक समर्थकों की जीत के बाद गंभीर हुए स्टोक्स समर्थक सीएम वीरभद्र सिंह की संजीवनी से सब कांग्रेसियों को एकजुट कर भाजपा को वर्ष 2017 में मात देना चाह रहे हैं।