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मंडी: शाही अंदाज में निकाली बाबा भूतनाथ की दूसरी और अंतिम जलेब, देवधुनों से गूंजी छोटी काशी

Fri, 20 Feb 2026 06:38 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

बाबा भूतनाथ की शिवरात्रि महोत्सव के दौरान दूसरी शाही जलेब शुक्रवार को निकाली गई। खलियार में ब्यास नदी के तट से इस भव्य जलेब का शुभारंभ ढोल नगाड़ों के साथ हुआ।
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मंडी शिवरात्रि की अंतिम जलेब, देवधुनों से गूंजी छोटी काशी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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छोटी काशी मंडी के अधिष्ठाता बाबा भूतनाथ की शिवरात्रि महोत्सव के दौरान दूसरी शाही जलेब शुक्रवार को निकाली गई। खलियार में ब्यास नदी के तट से इस भव्य जलेब का शुभारंभ ढोल नगाड़ों के साथ हुआ। स्थानीय देवी-देवताओं के साथ स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में इस जलेब में शिरकत की। ब्यास नदी के तट से शुरू हुई यह जलेब विक्टोरिया पुल, समखेतर, मोती बाजार, चौहटा बाजार, गांधी चौक, सेरी मंच और फिर इंदिरा मार्किट परिसर का चक्कर काटती हुई दोबारा ब्यास नदी के तट पर आकर ही संपन्न हुई। शिवरात्रि महोत्सव के दौरान बाबा भूतनाथ की इस शाही जलेब की परंपरा अभी हाल ही में शुरू की गई है।

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पहली जलेब शिवरात्रि वाले दिन निकाली गई थी जबकि दूसरी और अंतिम जलेब शुक्रवार को निकाली गई। बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि जलेब के दौरान सैकड़ों भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर बाबा भूतनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि इस भव्य आयोजन में कई संत महात्माओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। उन्होंने सभी को शिवरात्रि पर्व की बधाई देते हुए बाबा भोलेनाथ की कृपा की कामना की भी की।

 देवधुनों और देवलु नाटी से गूंजी छोटी काशी मंडी
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 के अंतर्गत देवधुन/वाद्ययंत्र एवं देवलु नाटी प्रतियोगिताओं का अंतिम चरण आज छोटी काशी मंडी में सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। आयोजन के दौरान देव समाज और श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह तथा गहरी आस्था का वातावरण देखने को मिला। इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त मंडी गुरसिमर सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने विजेता दलों को पुरस्कृत किया तथा अपने संबोधन में कहा कि शिवरात्रि महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देवधुन और देवलु नाटी जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं हमारी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रतियोगिता में कुल 85 देवताओं के बजंत्रियों ने वाद्ययंत्र श्रेणी में भाग लिया, जबकि देवलु नाटी प्रतियोगिता में नाै देवताओं के देवलु नाटी दलों ने हिस्सा लिया। देवलु दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर अपनी उत्कृष्ट कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया और पारंपरिक नाटी की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
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ढोल-नगाड़ों, करनाल, रणसिंघा व अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। देवधुन की मधुर प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया और हिमाचली लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के परिणामों में देवधुन/वाद्ययंत्र श्रेणी मेंदेव छमांहू खणी बालीचौकी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, देव अजयपाल कासला द्रंग ने द्वितीय, जबकि देव कांढलू बालाकामेश्वर बग्गी ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं देवलु नाटी प्रतियोगिता में देव सुहड़े का गैहरी उतरशाल ने पारंपरिक नाटी की प्रभावशाली प्रस्तुति के बल पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, देव  छांजणू बालीचौकी ने दूसरा, जबकि देव श्री तुंगासी निहरी सराज तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मुरारी शर्मा, कृष्णा देवी एवं उमेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैणी, सर्व देवता कमेटी के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा, सर्व देवता समिति के महासचिव दिनेश शर्मा सहित देव समाज से जुड़े गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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