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Shimla News: आयुष्मान-हिमकेयर मरीजों को नहीं मिल रहा मुफ्त उपचार

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आईजीएमसी में दवा कंपनियों ने बकाया बिलों का भुगतान न होने पर रोकी दवाओं की आपूर्ति
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कैंसर मरीजों को बाहर से खरीदने पड़ रहे इंजेक्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में कैंसर मरीजों के लिए आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी योजनाएं उम्मीद की किरण बनकर आई थीं। सरकारों का वादा था कि हर परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार मिलेगा।
अब हकीकत यह है कि कैंसर की महंगी दवाएं और इंजेक्शन मरीजों को मुफ्त में नहीं मिल रहे। सरकार ने करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान इन योजनाओं के तहत दवाओं की दुकानों और कंपनियों को करना है। बिलों का भुगतान न होने से दुकानदारों ने योजनाओं के तहत मरीजों को दवाओं की मुफ्त आपूर्ति बंद कर दी है। अस्पताल के जन औषधि स्टोर में भी दवाओं की सप्लाई बंद हो चुकी है।
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सप्लायर कंपनियों ने बकाया चुकता न होने के कारण दवा भेजनी बंद कर दी हैं। इसका सबसे बड़ा असर गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर पड़ा है। कैंसर के इंजेक्शन ट्रैस्टुजुमैब, बेवासिजुमैब और निमोटुजुमैब की कीमत दवा प्रति साइकिल (एक बार का डोज) 50,000 से 80,000 रुपये तक है, जो अधिकांश मरीजों की पहुंच से बाहर है। मरीजों को या तो कर्ज लेना पड़ रहा है, या उपचार बीच में छोड़ना पड़ रहा है। हाल के महीनों में कई शिकायतें सामने आई हैं कि आयुष्मान कार्ड के बावजूद मरीजों को पूरा खर्च खुद उठाना पड़ रहा है। 24 जून को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी दवाओं की कमी का मुद्दा विधानसभा में उठाया था।



केस स्टडी 1
शिमला की 47 वर्षीय सुनीता देवी (बदला हुआ नाम) एचईआर 2 ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने उन्हें ट्रैस्टुजुमैब इंजेक्शन की छह साइकिल लगाने की सलाह दी थी। परिवार के पास आयुष्मान कार्ड था लेकिन आईजीएमसी ने बताया कि दवा स्टॉक में नहीं है और यह पैकेज में शामिल नहीं हो सकता। हर डोज की कीमत लगभग 8,000 रुपये थी। मजबूरी में उनके पति को कर्ज लेकर दवा बाहर से खरीदनी पड़ी। आयुष्मान का नाम तो बड़ा है, पर महंगी दवाओं के लिए हमें कोई मदद नहीं मिली, पूरा बोझ हमारे सिर पर आ गया।
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केस स्टडी 2
बिलासपुर निवासी 57 वर्षीय देवराज शर्मा को कैंसर उपचार के लिए निमोटुजुमैब इंजेक्शन की जरूरत थी। परिवार हिमकेयर योजना से कवर था लेकिन इंजेक्शन समय पर उपलब्ध नहीं हुआ। जन औषधि स्टोर ने दावा किया कि इंजेक्शन का ऑर्डर दिया था लेकिन बकाया राशि के कारण सप्लाई रुक गई। देवराज की बेटी ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर कहा कि मेरे पिता को दवा नहीं मिली जबकि योजना होने के बावजूद हमें बाहर से इंजेक्शन खरीदने पड़े। इस घटना ने आईजीएमसी की दवा आपूर्ति और सरकारी योजनाओं की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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