अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रविवार को करवाई गई अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा में विद्यार्थियों ने खूब उत्साह दिखाया। सोलन, बिलासपुर और सिरमौर में यह परीक्षा करवाई गई। तीन जिलों में 252 विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी। परीक्षा सुबह 11:00 से दोपहर 12:30 तक हुई। हालांकि, उत्साहित विद्यार्थी परिजनों के साथ सुबह 9:00 बजे ही परीक्षा केंद्रों में पहुंच गए थे। परीक्षा के बाद विद्यार्थियों के चेहरों पर मुस्कान थी।
विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने कहा कि इस तरह की परीक्षाओं से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में भी मदद मिलती है। कुछ विद्यार्थियों ने पिछले साल भी यह परीक्षा दी थी। इस साल भी पूरे उत्साह के साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। 9वीं से जमा दो कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा करवाई गई।
परीक्षा के लिए थी उत्साहित
परीक्षा देने के लिए उत्साहित थी। परीक्षा केंद्र पर समय पर पहुंचने के लिए अभिभावकों के साथ सुबह से घर से निकलना पड़ा। परीक्षा देने का अच्छा अनुभव मिला है। प्रतियोगी और स्कूल की परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए इस परीक्षा से विश्वास मिलेगा। परीक्षा देने के बाद बहुत अच्छा लग रहा है।
- स्मृति, कक्षा 10वीं, छात्रा स्कूल सोलन
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कन्या बिलासपुर में बनाए परीक्षा केंद्र में 70 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस परीक्षा के लिए इतना उत्साह रहा कि दो छात्र कुल्लू के कसोल और बंजार से भी परीक्षा में भाग लेने बिलासपुर पहुंचे।
छात्रवृति के पैसों से लूंगा कोचिंग
कुल्लू के कसोल में घर है। ढालपुर पाठशाला में पढ़ाई कर रहा हूं। स्कूल में शिक्षकों ने छात्रवृत्ति की जानकारी दी। यदि यह छात्रवृत्ति मिलती है तो 12वीं कक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग लूंगा। - विश्वास ठाकुर, 11वीं कक्षा
सुबह पांच बजे निकले घर से
कुल्लू के बंजार में घर है। सुबह 5 बजे घर से निकला और अकेला बिलासपुर पहुंचा हूं। वाणिज्य संकाय में पढ़ाई कर रहा हूं। यदि छात्रवृत्ति मिलती है तो बैंक की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग लूंगा।
दिव्यांग वंश पिता के साथ पहुंचे
तारूवाला के 11वीं कक्षा के वंश पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने अपने पिता धमेंद्र कुमार के साथ नाहन पहुंचे। वंश ने कहा कि यूट्यूब पर जाकर 2018, 2019, 2022 और 2023 के इस परीक्षा के मॉडल पेपर देखे और तैयारी की। अधिकतर सवाल उनमें से ही आए थे। इसलिए कोई परेशानी नहीं हुई। धमेंद्र कुमार ने बताया कि वंश का 42 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना हुआ है।