खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से सरकारी दुकानों में दी जा रही राशन की सप्लाई पर सवाल उठ गए हैं। आटे से अधिक मात्रा में चोकर निकाली जा रही है। दालों में कंकड़ और सरसों तेल घटिया क्वालिटी का उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसका खुलासा खाद्य आपूर्ति विभाग और निगम की ओर से लिए गए सैंपलों में हुआ है। नवंबर 2013 से जून 2014 तक खाद्य आपूर्ति विभाग ने प्रदेश के विभिन्न राशन की दुकानों, गोदामों से खाद्य वस्तुएं के सैंपल लिए हैं।
इसमें 43 सैंपल फेल हुए हैं। फेल हुए सैंपल में दाल चना के 4 सैंपल, शुगर एस-30 के 2, शुगर एस-31 के 4 सैंपल, रुचि गोल्ड तेल के 11 सैंपल, गोकुल के 5 सैंपल, राजधानी तेल के 2 सैंपल, पीवी तेल का 1 सैंपल, विकटरी तेल का 1 सैंपल, नमक के सैंपल फेल हुए हैं।
मानक पर फेल हो रहा राशन
प्रदेश के 16 लाख राशन कार्ड धारकों को बेहतर राशन के लिए मापदंड तय हैं। केंद्र सरकार सब्सिडी के तौर पर गंदम उपलब्ध कराती है जबकि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर मीलों में गंदम की पिसाई करती है।
नियमों के मुताबिक 1 क्विंटल गंदम से 5 किलोग्राम चोकर निकाल सकते हैं, इसी तरह दालों में एक फीसदी तक कंकड़ रह सकता है। इससे ज्यादा कंकड़ रहने पर सैंपल फेल माना जाता है।
खाद्य, आपूर्ति निगम के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुमित खिमटा का कहना है कि फेल हुए सैंपल पर संबंधित सप्लायर पर कार्रवाई की जाएगी। खाद्य वस्तुएं सप्लाई करने वाली कंपनी की सिक्योरिटी मनी से 20 फीसदी राशि काटी जाएगी।
आप भी पहचान सकते हैं मिलावट
खाद्य आपूर्ति निगम की प्रयोगशाला के मुताबिक आटे से अगर अधिक मात्रा में चोकर निकाली जाए तो रोटी का रंग सफेद होगा और 5 मिनट के भीतर रोटी सूख जाएगी। रोटी एक दम करारी होगी।
इसी तरह दालों में अगर कंकड़ होते हैं तो वह सैंपल फेल है। कंकड़ एक फीसदी तक हो सकता है लेकिन ये कंकड़ नजर नहीं आ सकता। इसका पता सिर्फ प्रयोगशाला में ही लग सकता है।
तेल केमिकल पर निर्भर रहता है। तेल को गर्म कढ़ाई में डालने से अगर तेल चिटकता है तो वह ठीक नहीं माना जाता।