प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में जल्द अध्यापकों और विद्यार्थियों की टैबलेट पर हाजिरी लगाई जाएगी। सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों का रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की तैयारी में जुट गई है। रिजल्ट, हाजिरी और मिड-डे मील का सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसमें स्कूलों में तैनात शिक्षकों, रिक्त पदों की संख्या का भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस योजना के लागू होने पर एक क्लिक पर स्कूलों की हर जानकारी मिल जाएगी।
कागजी कामकाज का झंझट भी खत्म होगा। उच्च अधिकारियों से लेकर सरकार तक हर जानकारी आसानी से पहुंच जाएगी। प्रदेश के सभी प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में यह योजना लागू करने की तैयारी है। इसके तहत स्कूलों में टैबलेट मुहैया करवाए जाएंगे। टैबलेट में एक विशेष सॉफ्टवेयर डाला जाएगा। इसे बनाने में शिक्षा विभाग जुट गया है।
मिड-डे मील का बन रहा सॉफ्टवेयर
सॉफ्टवेयर को प्रयोग करने का शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण में सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की हाजिरी लगाई जाएगी। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या का ब्यौरा कक्षावार तैयार किया जाएगा। परीक्षाओं में प्राप्त होने वाले अंकों की जानकारी इसमें दी जाएगी। मिड-डे मिल योजना का ब्यौरा दिया जाएगा। इसके अलावा स्कूल में तैनात शिक्षकों, रिक्त पदों की जानकारी भी सॉफ्टवेयर में डाली जाएगी।
इस योजना के लागू होने के बाद शिमला में बैठे अधिकारी एक क्लिक पर दूरदराज जिला चंबा जैसे स्कूलों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने इस योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पीटरहॉफ शिमला में नई शिक्षा नीति को लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना से अवगत करवाया गया।
नई शिक्षा नीति पर ग्रामीणों की राय लेगी सरकार
नई शिक्षा नीति बनाने के लिए राज्य सरकार ग्रामीणों से भी राय लेगी। अगस्त महीने में प्रस्तावित ग्राम सभाओं में से मामले को एजेंडे में शामिल किया जाएगा। ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों से भी देश की नई शिक्षा नीति बनाने में सहयोग की अपील की गई है। इसके अलावा शिक्षा विभाग जल्द ही जिला परिषद प्रतिनिधियों के साथ भी इस मामले को लेकर एक बैठक आयोजित करेगा। दो महीने के भीतर नई शिक्षा नीति पर हिमाचल प्रदेश का पक्ष तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसी कड़ी में शुक्रवार को शिमला के पीटरहाफ होटल में पहली बैठक का आयोजन किया गया। आने वाले दिनों में इस तरह की कई बैठकें बुलाई जाएंगी। तीस साल बाद बनाई जा रही नई शिक्षा नीति जन सहभागिता से तैयार होगी। ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर पर लोग शिक्षा नीति के लिए अपनी राय दे सकते हैं। सुझावों पर विचार के बाद सरकार इस पर रजामंदी की मुहर लगाएगी। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय साल 1986 की शिक्षा नीति को बदल रहा है।
हिमाचल सरकार से भी इस बाबत राय मांगी गई है। केंद्र सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लिए देश की जनता से राय मांगी है। सरकार के मुताबिक वह देश की आबादी की बदलती जरूरतों के अनुकूल एक राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करना चाहती है। इसका उद्देश्य छात्रों को जरूरी कौशल और ज्ञान से लैस कर भारत को एक ज्ञान महाशक्ति बनाना और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग में मानव श्रम की कमी को खत्म करना है।
नीति बनाने में करें सहयोग- अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने बताया है कि अगस्त महीने में होने वाली ग्राम सभाओं में नई शिक्षा नीति को लेकर अपनी राय देने को कहा गया है। हर वर्ग से प्राप्त होने वाली राय के बाद एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार की मंजूरी को भेजा जाएगा। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद हिमाचल का पक्ष केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से नई शिक्षा नीति बनाने में सहयोग की अपील की है।
नई शिक्षा नीति पर हुई बैठक पर उठाए सवाल
प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने पीटरहॉफ में नई शिक्षा नीति को लेकर आयोजित बैठक पर सवाल उठाए हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष कल्याण भंडारी, राज्य कार्यकारी अध्यक्ष डा. अश्वनी कुमार, महासचिव सुरेंद्र सकलानी, वरिष्ठ उप प्रधान हरी शर्मा, संगठन सचिव डा. अक्षत, राज्य प्रेस सचिव प्रेम शर्मा, कार्यालय महासचिव डा. संजोग भूषण ने कहा कि बेहतर होता कि इस बैठक में उन शिक्षकों को बुलाया जाता, जिनका विद्यार्थियों के साथ सीधा संबंध है।
कहा कि शिक्षकों को शामिल किए बिना किस आधार पर नीति बनाई जा रही है। शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की खामियों और कमियों के बारे में बेहतर ज्ञान है। बैठक में शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों ने भाग लिया जो अपने समय में शिक्षक रहे हैं, परंतु आज व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाए, यह आज का शिक्षक बेहतर जनता है। नीति को बनाने से पहले जिन के लिए नीति बनाई जा रही है, जिन लोगों ने नीति लागू करनी है, उनकी राय लेना जरूरी होता है।
संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डा. अश्वनी कुमार ने बताया की नई शिक्षा नीति को लागू करते समय अध्यापकों और विद्यार्थियों का अनुपात ठीक होना चाहिए। विद्यालयों में प्रवेश की तिथियां निश्चित होनी चाहिए। प्रवेश तिथियां दो महीनों तक चली रहती है। इससे पढ़ाई बाधित होती है। इसलिए समय पर दाखिला होना चाहिए। शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न करवाए जाए। संघ ने मांग की है की सभी शिक्षक संगठनों को अपने सुझाव देने की लिए बुलाया जाए।