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अटल टनल रोहतांग: सदियों की बर्फ की कैद से आज मुक्त होंगे लाहौली

Sat, 03 Oct 2020 09:27 AM IST
Krishan Singh अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग
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लाहौल में नदी पर बना पुल - फोटो : अमर उजाला
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आखिर वो पल आ ही गया जिसका इंतजार लाहौल घाटी के बाशिंदे सदियों से कर रहे थे। आज उन्हें छह माह तक बर्फ की कैद से मुक्ति मिलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अटल टनल रोहतांग के उद्घाटन के पल को देखने के लिए घाटी के लोग पलकें बिछाए हुए हैं। यह दिन उनके लिए बहुत बड़ी सौगात लेकर आया है। सदियों से छह महीने की बर्फ की कैद से आज लाहौल स्पीति के लोगों को आजादी मिल जाएगी। घाटी के लोगों का अरसे से संजोया सपना पूरा होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुप्रतीक्षित अटल टनल का लोकार्पण करने जा रहे हैं। 37 साल पहले इस सुरंग का संकल्प रखा गया। आखिर लंबे इंतजार के बाद वह क्षण आ ही गया है, जब यह टनल बनकर तैयार हो गई है। 

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लाहौल स्पीति के लोग शेष विश्व से छह महीने के लिए पूरी तरह से कट जाते हैं। रोहतांग दर्रे पर बर्फ के पहाड़ जम जाते हैं तो दुनिया के अन्य हिस्सों में जाने का कोई भी रास्ता यहां के लोगों के पास नहीं होता है। ऐसे में अक्तूबर से लेकर मार्च-अप्रैल महीनों तक लोगों को अपने घरों में ही कैद होना पड़ता है। केलांग और उदयपुर को छोड़कर सारे बाजार बंद हो जाते हैं। आबादी वाले हिस्से में औसतन दस से बारह फीट तक बर्फ गिर जाती है। इसलिए लोगों को छह महीने के अनाज, राशन, पानी, लकड़ी, दवा आदि का प्रबंध पहले ही कर लेना पड़ता है। 

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हिमखंडों की चपेट में आ जाते हैं कई गांव 

कोकसर, डिंफू, योचे, छीका जैसे दूरदराज के गांव हिमखंडों की चपेट में आ जाते हैं, इसलिए इनके निवासियों को अपने घर छोड़ देने पड़ते हैं। ये कुल्लू, मनाली आदि में बस जाते हैं। वहां पर भी इनमें से अधिकतर लोग घर बना चुके हैं। 

प्रसव के लिए छह महीने पहले ही कुल्लू निकल जाते हैं लोग  
प्रसूता महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से छह महीने पहले ही यहां से कुल्लू निकलना पड़ता है। छह-छह महीने तक किराये पर कमरे लेने होते हैं। बहुत सी महिलाओं की हिमपात के बीच प्रसव में जानें तक चली गई हैं। बॉक्स
 
रोहतांग दर्रे में 100 से अधिक लोग गंवा चुके हैं जान
बीते दस साल में बर्फ से ढके रोहतांग दर्रे में 100 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। यहां पर बर्फ के बवंडर आए और कई बार हिमखंड भी गिरे।
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