कोकसर, डिंफू, योचे, छीका जैसे दूरदराज के गांव हिमखंडों की चपेट में आ जाते हैं, इसलिए इनके निवासियों को अपने घर छोड़ देने पड़ते हैं। ये कुल्लू, मनाली आदि में बस जाते हैं। वहां पर भी इनमें से अधिकतर लोग घर बना चुके हैं।
प्रसव के लिए छह महीने पहले ही कुल्लू निकल जाते हैं लोग
प्रसूता महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से छह महीने पहले ही यहां से कुल्लू निकलना पड़ता है। छह-छह महीने तक किराये पर कमरे लेने होते हैं। बहुत सी महिलाओं की हिमपात के बीच प्रसव में जानें तक चली गई हैं। बॉक्स
रोहतांग दर्रे में 100 से अधिक लोग गंवा चुके हैं जान
बीते दस साल में बर्फ से ढके रोहतांग दर्रे में 100 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। यहां पर बर्फ के बवंडर आए और कई बार हिमखंड भी गिरे।