सामाजिक एवं अधिकारिता विभाग पर एक एनजीओ को करीब 97 लाख रुपये के प्रोजेक्ट की मंजूरी देने पर सवाल उठे रहे हैं। राज्य स्तरीय बहु-विषयक अनुदान सहायता समिति (एमडीजीआईए) की बैठक के बाद यह मामला सामने आया है। समिति के सदस्य सचिव ने एनजीओ के प्रोजेक्ट को नामंजूर कर बैठक की कार्यवाही की रिपोर्ट प्रदेश सचिव को भेजी है। इसमें कहा गया है कि कांगड़ा की एक स्वयंसेवी संस्था के वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए तीनों प्रस्तावों की अनुशंसा बैठक में नहीं की गई थी, लेकिन समिति के चेयरमैन की ओर से भेजी गई कार्यवाही रिपोर्ट में यह गलत रूप से अनुमोदित किया गया है। सदस्य सचिव ने राज्य सरकार से तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया है। सदस्य सचिव ने प्रशासनिक विभाग को इस संस्था के राज्य स्तरीय समन्वय एजेंसी के रूप में पंजीकरण को रद्द करने की भी सिफारिश की है। बताया जा रहा है कि बैठकी की कार्यवाही को चेयरमैन के अनुमोदन से सदस्य सचिव की ओर से जारी किया जाता है।
बैठक में निदेशालय से प्रदेश में पांच नशा मुक्ति केंद्रों में से 3 को मंजूरी देनी की अनुशंसा नहीं देने का प्रस्ताव आया था। लेकिन समिति में चर्चा के बाद उस संस्था के तीन प्रस्तावों को सशर्त मंजूरी देने का फैसला लिया गया है। आशीष सिंहमार, प्रदेश सचिव सामाजिक एवं अधिकारिता विभाग