हिमाचल हाईकोर्ट के वन भूमि पर उगाए सेब बगीचों से फल तुड़ान के आदेश धरातल पर लागू होने से पहले ही कब्जाधारियों ने सेब तोड़कर मंडियों में पहुंचा दिया। प्रदेश में ऐसे कई अवैध सेब बगीचे खाली कर दिए गए हैं। कुल्लू, अपर शिमला समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में कब्जाधारी बगीचों से सेब तुड़ान कर रहे हैं। रोहड़ू में शिकायत पर एक कब्जाधारक के खिलाफ पुलिस में केस भी दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वन भूमि पर उगाए पेड़ों से खुद सेब तुड़ान करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद अभी तक वन विभाग अवैध सेब बगीचों की नीलामी ही नहीं करवा पाया है। इस प्रक्रिया में तीन सप्ताह तक लग सकते हैं। विभाग यह आकलन भी नहीं करवा पाया है कि अवैध सेब बगीचों में कितनी पेटी सेब निकलेगा। हाईकोर्ट ने सेब तुड़ान प्रक्रिया की वीडियोग्राफी के भी आदेश दिए हैं। बता दें कि प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में 3 अगस्त को स्टेटस रिपोर्ट सौंपकर माना है कि 31 मई 2015 तक सरकारी भूमि पर 9727 अवैध कब्जों के मामले दर्ज किए हैं।
कुल्लू की खराहल घाटी के वेद राम, दौलत राम और लाल चंद का कहना है कि क्षेत्र के कई अवैध सेब बगीचों में तुड़ान हो चुका है। रसूखदारों एवं चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी तंत्र चुपचाप तुड़ान होता देख रहा है। डिमार्केशन के बाद नीलामी करते-करते एक माह लग सकता है, विभाग को पहले ही बगीचों को कब्जे में ले लेना चाहिए। अरण्यपाल कुल्लू गिरीश होसूर का कहना है कि वन भूमि पर कब्जों की निशानदेही और नीलामी प्रक्रिया का कार्य चल रहा है। कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन होगा।
चमन लाल, डीएफओ रोहड़ू ने बताया कि बगीचों की नीलामी के लिए कमेटियों का गठन कर दिया है। एक सप्ताह में सभी कमेटियां अपने अपने क्षेत्र से सेब पैदावार की रिपोर्ट तैयार करेंगी। नंदपुर के एक अवैध बगीचे से सेब तुड़ान की शिकायत मिली थी, पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।