हिमाचल प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर पशुपालन विभाग पशु एंबुलेंस सेवा शुरू करेगा। प्रत्येक पशु एंबुलेंस में एक चालक, एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट तैनात रहेंगे और पशुपालकों को घरों पर पशु स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी। केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक एंबुलेंस के लिए शत-प्रतिशत वित्तीय मदद मिलेगी। दूसरे चरण में वेतन और वाहनों की मरम्मत के लिए केंद्र 90 और राज्य सरकार 10 फीसदी की वित्तीय भागीदारी निभाएगी।
अभी तक पशुपालकों को पशु चिकित्सालयों और पशु डिस्पेंसरियों में पशुओं का उपचार कराने के लिए ले जाना पड़ता था। ऐसी स्थिति में पशुओं को बीमार अवस्था में पशु चिकित्सालय और डिस्पेंसरी में ले जाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
हिमाचल प्रदेश में पशु एंबुलेंस सेवा को जोड़ने के लिए सेंटर स्थापित किए जाएंगे। जैसे किसी गांव से पशुपालक पशु स्वास्थ्य सेवा के लिए सेंटर से संपर्क करेगा तो सेंटर खुद संपर्क करके नजदीकी एंबुलेंस को तत्काल मौके पर भेज देगा। इसके बाद अगर कोई और सेवा की मांग करता है तो आसपास की एंबिलेंस को पशु के उपचार के लिए भेज देगा।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार करीब पचीस लाख पशु हैं। इन्हें अभी तक ऐसी कोई भी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं है। पशुओं को हर साल वैक्सीन लगाने के लिए भी एंबुलेंस सेवा अहम मानी जा रही है। पशु एंबुलेंस सेवा ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस सेवा के लिए बने सभी सेंटर ऑनलाइन जुड़ेंगे, ताकि पशुपालकों को यह सेवा हासिल करने में कोई परेशानी हो।
क्या कहते हैं निदेशक
पशु चिकित्सा निदेशक डॉ. अजमेर सिंह डोगरा कहते हैं कि प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर पशु एंबुलेंस सेवा शुरू की जा रही है। केंद्र सरकार एंबुलेंस खरीदने के लिए शत-प्रतिशत वित्तीय मदद करेगी। इसके बाद रकरखाव और मुलाजिमों को वेतन का खर्चा र्केंद्र और राज्य सरकार 90 फीसदी और 10 फीसदी वहन करेंगी।