सेब बागवानी के समक्ष चुनौतियां और समाधान विषय पर शिमला में हुआ अमर उजाला संवाद।
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कभी अपर शिमला से लेकर किन्नौर तक राशन, कपड़े, जूते का कारोबार करने वाला राजधानी शिमला का बाजार अब शहर तक सिमटकर रह गया है। घटते पर्यटन, बढ़ती आनलाइन खरीदारी, महंगे ट्रांसपोर्ट सिस्टम और पार्किंग की कमी के चलते यहां की मंडियां और बाजार घाटे में जा रहे हैं।
शिमला में पर्यटन, कारोबार और इसकी चुनौतियां विषय पर सोमवार को आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में कारोबारी बोले कि टूरिज्म और ट्रेड को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार को सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिमला में न नए पर्यटन स्थल विकसित हुए और न ही लोगों-सैलानियों की सहूलियतें बढ़ीं। हालत यह है कि शहर के ऐतिहासिक बाजारों के कई दुकानदार अब दुकानों से थड़ी पर आ गए हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिमला में आधारभूत ढांचा बढ़ाना होगा। नई पार्किंग बनानी होंगी। अनाज और सब्जी मंडी मुख्य सड़कों से कट गईं हैं। परवाणू से जो एक क्विंटल सामान 80 रुपये में शिमला पहुंचता है, वहीं सामान यहां मजदूरों के जरिये कार्ट रोड से अनाज मंडी पहुंचाने में 120 रुपये लग जाते हैं। अनाज और सब्जी मंडी शहर से बाहर मुख्य सड़कों पर शिफ्ट करनी होंगी। दशकों से चल रही इस योजना को धरातल पर उतारने में सरकारों गंभीरता दिखानी होगी।
1983 से कागजों में शिफ्ट हो रहीं मंडियां
अनाज और सब्जी मंडी शिफ्ट करने की योजना 1983 से चल रही है। इनके लिए कई जगह भी चिह्नित हुई लेकिन आज तक मंडियां शिफ्ट नहीं हो पाईं। कभी पूरे पहाड़ी क्षेत्र को राशन भेजने वाली शिमला की अनाज मंडी अब सिर्फ यहां गली मोहल्लों की मंडी बनकर रह गई है। अनाज कारोबारी मसाले बेच रहे हैं। मंडी के भीतर वाहन सुविधा न मिलने से ग्राहक अब दूसरे शहरों से राशन ला रहे हैं। - दीपक श्रीधर, अध्यक्ष अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
मंडी की सुधरे हालत, बाजारों के पास बने पार्किंग
अनाज मंडी समेत शहर के अन्य बाजार मुख्य सड़क से दूर हैं। सामान लाने और ले जाने का काम मजदूरों के सहारे है। पार्किंग न होने से लोग परेशान होते हैं। इसीलिए लोग शिमला के बाजारों के बजाय दूसरे शहरों का रुख कर रहे हैं। इससे शिमला का कारोबार घट रहा है। मंडियों की हालत भी सुधरनी चाहिए। बाजारों के पास नई पार्किंग तैयार करनी चाहिए। -उमेश कुठियाला, कारोबारी अनाज मंडी
फीलगुड की जगह परेशान होते हैं सैलानी
शिमला में पर्यटन के लिए अब कुछ नहीं है। कोई नए आकर्षक स्थल नहीं बनाए हैं। इसमें जो सैलानी आते भी हैं, उन्हें भी शहर से बाहर गाड़ी खड़ी करनी पड़ती है। फीलगुड की जगह सैलानी परेशान होकर वापस जा रहे हैं। सरकार को अगले दस साल की जरूरत को देखते हुए पार्किंग बनानी चाहिए। शिमला में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर होने वाले मेलों, समारोहों में प्रमोशन करना चाहिए। -मनु अग्रवाल, कारोबारी एवं कोषाध्यक्ष मालरोड बिजनेस एसोसिएशन
प्रवेशद्वार पर तैनात हों अच्छे गाइड, बढ़ेगा पर्यटन
प्रदेश के प्रवेश द्वार पर सरकार को अच्छे गाइड तैनात करने चाहिए। यह सैलानियों को पंफ्लेट या बुकलेट के जरिये शिमला के ऐतिहासिक स्थानों, मंदिरों, पर्यटक स्थलों की जानकारी दें ताकि शिमला आने वाले सैलानी इन स्थानों पर घूमने का सोचें। इससे कारोबार बढ़ेगा। शहर में सैलानियों से अच्छे व्यवहार और बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रैम संचालक से लेकर टैक्सी चालक तक प्रशिक्षित किए जाएं। - वरिंद्र सिंह ऋषि, अध्यक्ष शिमला मालरोड बिजनेस एसोसिएशन
शिमला में बड़े मंदिर, पर्यटक स्थल हों विकसित
एक बार शिमला आने वाला सैलानी अब यहां दोबारा नहीं आता। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां सरकार के पास कोई नीति नहीं है। शहर के बाजार खाली हैं। अंग्रेजों की बनाई राजधानी अब बूढ़ों का शहर बनती जा रही है। शहर में बड़े मंदिर, ऐतिहासिक और पर्यटन के स्थल विकसित होने चाहिए जिन्हें देखने के लिए लोग शिमला आएं। इससे कारोबार भी बढ़ेगा। -राजकुमार अग्रवाल, कारोबारी लोअर बाजार एवं उपाध्यक्ष व्यापार मंडल
परवाणू से शिमला सस्ता, कार्टरोड से गंज महंगा
परवाणू से एक क्विंटल राशन 80 रुपये में शिमला पहुंचता है। यही राशन कार्टरोड से गंज मंडी पहुंचाने के लिए मजदूरों को 120 रुपये देने पड़ते हैं। इससे राशन उपनगरों से महंगा हो रहा है। करोड़ों रुपये की मार्केट फीस चुकाने पर भी मंडियां खस्ताहाल हैं। फोरलेन बनने से शिमला पूरी तरह से कट जाएगा। सरकार को चाहिए कि शहर को इससे जोड़ा जाए ताकि कारोबार पर असर न पड़े। -संजीव ठाकुर, अनाज कारोबारी एवं अध्यक्ष शिमला व्यापार मंडल
होटलों को बेचने को मजबूर संचालक
पर्यटन कारोबार इतना मंदा है कि 50 फीसदी से ज्यादा संचालक अब अपने होटल बेचने को तैयार हैं। पहले सैलानियों की बसें लक्कड़ बाजार तक आती थीं। अब इन्हें शहर से बाहर रोका जाता है। ये वहीं होटलों में ठहरते हैं जिससे शहर के होटल खाली हैं। कुफरी में सिर्फ घोड़ों की लीद दिखती है। राम मंदिर की तरह शिमला में भी मंदिर या अन्य स्थल विकसित होने चाहिए ताकि रोजगार और कारोबार बढ़ सके। - संदीप सूद, होटल कारोबारी
खंडहर हो गई हेरिटेज इमारतें, सुविधाएं शून्य
शहर की हेरिटेज इमारतें खंडहर हो रही हैं। यहां पार्किंग से लेकर पानी तक महंगा है। पहले तनाव दूर करने, हनीमून मनाने के लिए सैलानी शिमला आते थे। अब यहां खस्ता सड़कें और पार्किंग न होने से तनाव लेकर जाते हैं। पार्किंग को लेकर हमने प्रशासन को प्रस्ताव दिए थे जो आज तक पूरे नहीं हुए। 24 घंटे पानी की योजना बचपन से सिर्फ सुन ही रहे हैं। सरकारें कर्मचारियों को तो सब लाभ देती हैं लेकिन कारोबारियों के लिए कुछ नहीं करती। -कवि खन्ना, इलेक्टि्रानिक कारोबारी मालरोड शिमला
शिमला में सामान बेच रहे बाहरी लोगों पर हो सख्ती
शिमला में बाहरी राज्यों से कारोबारी गाड़ियां भरकर अपना सामान बेच रहे हैं। खाने पीने तक की चीजों की बिक्री हो रही है। इनके पास लाइसेंस तक नहीं हैं। यह क्या सामान बेच रहे हैं, इसकी कोई जांच तक नहीं होती। जिन अधिकारियों को इनकी जांच करनी चाहिए, वे दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते। सरकार ने अब दस साल बाद ट्रेड वेलफेयर एसोसिएशन बनाई है जिसमें इस कारोबार और कारोबारियों से जुड़े मुद्दे उठाएंगे। -सुरेश गुप्ता, अध्यक्ष घणाहट्टी व्यापार मंडल
कारोबारी बेचें तो टैक्स, तहबाजारी बेचें तो छूट
शहर के बाजारों में अब पहले जैसी रौनक नहीं दिखती। शाम 6:00 बजे अब बाजार खाली हो जाते हैं। दुकानदार जो सामान बेचते हैं, उस पर टैक्स देना पड़ता है। वही सामान अगर सड़क पर बैठा तहबाजारी बेचे तो कोई टैक्स नहीं लगता। लोअर बाजार में कारोबार बढ़ सकता है। इसके लिए शहर में पार्किंग बननी चाहिए। आनलाइन शॉपिंग के लिए नियम बनने चाहिए। लटकते तार भूमिगत होने चाहिए। -अजय सरना, ऊनी वस्त्र कारोबारी एवं उपाध्यक्ष शिमला व्यापार मंडल
सिर्फ शिमला-किन्नौर पर ही मार्केट फीस क्यों
प्रदेश में कहीं भी मार्केट फीस नहीं लगती। सिर्फ शिमला और किन्नौर में ही इसे वसूला जा रहा है। आनलाइन शॉपिंग से कारोबार चौपट है। सामान लेकर आने वाली गाड़ियां शहर में तीन-तीन दिन तक खड़ी रखी जाती हैं। अनलोडिंग की बारी आए तो मजदूर नहीं मिलते। इसीलिए ट्रांसपोर्टर शिमला के बजाय अब रामपुर जाते हैं। सरकार को चाहिए कि बाजार विकसित करें। हम पीपीपी मोड पर भी बनाने को तैयार हैं। कारोबारी को बीमा सुरक्षा मिले। -नितिन सोहल, होलसेल कारोबारी एवं महासचिव शिमला व्यापार मंडल
टूरिस्ट सीजन में बाहरी कारोबारी कमा रहे पैसा
शिमला में कारोबार ठप हो रहा है। इसे पटरी पर लाने की कोई सरकार कोशिश नहीं कर रही। पर्यटन सीजन आता है तो रिज, मालरोड पर बाहरी राज्यों के कारोबारियों को सामान सजाने के लिए बिठा देते हैं। टैक्स भरने वाले शहर के कारोबारी खाली रहते हैं। कई बार इसका विरोध कर चुके हैं। मंडियां शिफ्ट करने की योजना लटकी पड़ी है। हम सीएम से मिले हैं और मांग की है कि जल्द इस योजना पर काम किया जाए। - हरजीत मंगा, अध्यक्ष शिमला व्यापार मंडल