मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि हिमाचल में जितने भी बच्चे सम्मानित किए गए हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में बेटियों ने अच्छे स्थान हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि वह बेटियों को तो यही कह सकते हैं कि वे आगे बढ़ें। एक समय वे कहते थे कि बेटी पढ़ाओ, पर अब दौर यह आ गया है कि बेटो को पढ़ाओ बोलना पड़ेगा। सीएम जयराम ठाकुर शुक्रवार को शिमला के खलीनी स्थित होटल ईस्ट बोर्न में अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह-2022 में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश भर से आए राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड के 10वीं और 12वीं कक्षा के 140 टॉपर्स सम्मानित किए। इनमें 10 कक्षा के 64, 12वीं कक्षा में कला संकाय के 19, वाणिज्य के 16 और विज्ञान के 41 विद्यार्थी सम्मानित हुए। इनमें छात्राओं की संख्या सर्वाधिक रही।
इस अवसर पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि संपन्न परिवार के बच्चे पढ़ाई में अच्छे होंगे, यह जरूरी नहीं है। जयराम बोले कि अभिभावकों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। अच्छे परिवार के बच्चे ड्रग्स की चपेट में हैं। पीढ़ियां बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने कहा कि सब ऐसी चीजों में उलझकर रह गए हैं। पड़ोसी राज्यों में देखते हैं तो स्थिति चिंताजनक हो गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी हालात अच्छे नहीं हैं, जिनके लिए सजग होना होगा। इससे अभिभावकों और परिजनों की जिम्मेवारी बढ़ गई है। सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल छोटा सा प्रदेश है, लेकिन इसने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किए हैं। यहां साधन और सुविधा की कमी हो सकती है पर यहां प्रतिभा, योग्यता और क्षमता की कमी नहीं है। अभिभावकों के पास समय कम होता है।
बच्चा कैसा प्रदर्शन कर रहा है, जब उनका इस ओर ध्यान नहीं जाता है तो अच्छा होने के बावजूद वे बेहतरीन कार्य नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और गुरुजनों के लिए हमेशा आदर का भाव रखा जाना चाहिए। यही हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। तकनीक के इस युग में इसमें कमी आई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि अमर उजाला नियमित रूप से मेधावी छात्र सम्मान समारोह हर वर्ष आयोजित कर रहा है, यह सराहनीय है। इस सम्मान समारोह में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग, कृषि एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर, सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक हरबंस ब्रसकॉन, पुलिस अधीक्षक कानून व्यवस्था सृष्टि पांडे, एपीएमसी शिमला के अध्यक्ष नरेश शर्मा, शिमला कॉआपरेटिव फेडरेशन के अध्यक्ष नरेश चौहान आदि मौजूद हुए।
अमर उजाला में स्वतंत्र होकर अपनी बात को कहने का साहस
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि अमर उजाला में स्वतंत्र होकर अपनी बात को कहने का साहस है। यानी जो ठीक है, वह ठीक है, जो नहीं है, वह नहीं है। इस दृष्टि से अमर उजाला साहस दिखाता है जो चौथे स्तंभ का कर्तव्य भी है। यह 19वां कार्यक्रम है। इस प्रकार से बच्चों को यहां आकर अवसर देना बड़ी बात है। निश्चित रूप से अमर उजाला पुण्य का काम कर रहा है और बच्चों को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होेंने बच्चों को कहा कि उन्हीं में से ही होंगे, जो आने वाले समय में आने वाली पीढ़ी को सम्मानित करेंगे। आपमें से ही अधिकारी, वैज्ञानिक और डाक्टर बनेंगे। अलग-अलग क्षेत्र में काम कर अपने-अपने क्षेत्र, स्कूल और परिवार का नाम रोशन करेंगे।
जैसी परीक्षा आपने दी, वैसी ही परीक्षा के दौर से आजकल हम गुजर रहे
सीएम जयराम ठाकुर ने बच्चों को कहा कि जैसी परीक्षा आपने दी, वैसी ही परीक्षा के दौर से हम गुजर रहे हैं। परिणाम क्या होगा, यह आने वाले वक्त में मालूम होगा। मगर उन्हें उम्मीद है कि अच्छा ही होगा। परिश्रम का परिणाम अच्छा होता है। अपने हाथ में केवल यही होता है कि हम केवल परिश्रम कर सकते हैं। बहुत सारी चीजें हमारे हाथ में नहीं होती है, उन्हें छोड़ देना चाहिए।
मुझे मंच पर चढ़कर सम्मानित होने का अवसर नहीं मिलता था
- मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि बच्चे परिश्रम करने के बाद यहां सम्मानित होने आए हैं, उन्हें वह बधाई देते हैं। इन बच्चों ने मेहनत की है और अब उसका परिणाम आया है। उन्हें सम्मानित होने का अवसर भी मिला है। निश्चित रूप से यह जीवन भर का एक ऐसा पल होता है, जिसे सब याद रखेंगे। यह अवसर सबके जीवन में नहीं होता है और उनक जिंदगी में भी नहीं आया। वे पढ़ते थे, मगर उन्हें मंच पर चढ़कर सम्मानित होने का अवसर नहीं मिलता था। आने वाले समय में पढ़ाई के बाद वह जहां भी जिस भी क्षेत्र में जाएंगे, वहां पर पढ़ाई के बाद सबका भविष्य बहुत उज्ज्वल होगा।
हम पीजी करने गए तो दादाजी ने बोला, 16 जमात पढ़ ली
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि आज सुदूर गांव का बच्चा पढ़ाई में बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है और खेल के क्षेत्र में भी बेहतरीन काम कर रहा है। आने वाले समय में इस पर फोकस करने की जरूरत है। पहले एक जमाना ऐसा होता था कि जब ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करना बड़ी बात मानी जाती थी। उन्होंने कहा कि जब हम पीजी करने गए तो हमारे दादाजी बोलते थे, सोलह जमात पढ़ लिए। आज इस बात का कोई महत्व नहीं रह गया है। आज प्रतिस्पर्धा का दौर है। इसमें सफल हो गए तो भविष्य आपका है। ऐसे में बहुत फोकस होकर काम करने की जरूरत है। जब हम फोकस होकर किसी लक्ष्य पर काम करते हैं तो उसे हासिल किया जा सकता है।
अंकल, आप स्कूल खोल रहे हैं और आपको मालूम है कि कोरोना फैला है
सीएम जयराम ठाकुर बोले कि बीच में कोविड का बीच में दौर आया। उस दौर से हम बाहर निकले। बच्चों की पढ़ाई बाधित कक्षाएं होती रहीं, मगर जो कक्षा में पढ़ने को मिलता है और आई टू आई कांटैक्ट जो शिक्षकों से बच्चों का होता है, वह नहीं हो पाया। बच्चों को अच्छा भी लगा कि स्कूल जाने की जरूरत नहीं है। जब हमने स्कूल खोले तो बच्चों ने संदेश किए- अंकल, आप स्कूल खोल रहे हैं और आपको मालूम है कि कोरोना फैला है। हमने कहा कि हमें मालूम है। अगर हमें कोरोना हो गया तो कौन जिम्मेवार है। मैंने कहा - बच्चे आपके अभिभावक हैं, आपके पास बात करता हूं। बहुत सारे बच्चे यह भी कह रहे थे कि वे घर में बोर हो गए हैं, अपने साथियों से मिल नहीं पाते हैं। हमने इस दौर को पार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तो इस पर बहुत ज्यादा फोकस रहा है।