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Shimla: सम्मान पाकर चमके टॉपर, सीएम के साथ किसी ने ली सेल्फी, कोई हाथ मिलाता और पांव छूकर आशीर्वाद लेता दिखा

Fri, 15 Sep 2023 07:47 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

 राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सम्मान पाकर टॉपर छात्र-छात्राओं के चेहरे चमक उठे। 
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सम्मान पाकर चमके टॉपर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में मेधावियों ने अगली उड़ान के लिए अपने पंख खोले। राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सम्मान पाकर टॉपर छात्र-छात्राओं के चेहरे चमक उठे। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ किसी ने सेल्फी ली, किसी ने हाथ मिलाया तो किसी ने पांव छूकर आशीर्वाद लिया। बच्चों की इस सफलता की यादें संजोने के लिए कई अभिभावकों ने इन पलों को कैमरों में कैद किया। शुक्रवार को राजधानी शिमला में समारोह से स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की मेरिट सूची में शामिल मेधावी कभी न भूले जाने वाले पल समेट कर साथ ले गए।

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बच्चों ने भविष्य में देश और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए और लगन से पढ़ाई करने का प्रण लिया। दसवीं कक्षा के सम्मानित होने वाले बच्चों ने बारहवीं कक्षा के परिणामों में भी टॉप कर दोबारा अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह का हिस्सा बनने की बात कही। अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में सम्मानित होने वाले मेधावियों के चेहरों पर अलग ही चमक नजर आई। बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी उत्साहित नजर आए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, कृषि मंत्री चंद्र कुमार और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने एक-एक बच्चे के साथ बातचीत भी की। दूरदराज क्षेत्रों के बच्चों के भी टॉप करने पर मुख्यमंत्री बहुत खुश हुए। बच्चों की पीठ थपथपा कर उन्होंने प्रोत्साहित किया।

यह पल बच्चों और अभिभावकों के लिए यादगार बन गए। सम्मानित होने के लिए मेधावी छात्र-छात्राएं राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ के दरबार हॉल में शुक्रवार सुबह आठ बजे से ही जुटना शुरू हो गए थे। उनमें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हाथों अमर उजाला का यह सम्मान पाने का भारी उत्साह था। फिर जब बारी-बारी सम्मानित होने का सिलसिला शुरू हुआ तो तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मेधावियों के लिए यह अविस्मरणीय क्षण बन गए। बच्चों के चेहरे की चमक उन्हें मिले मेडल की चमक से कम नहीं थी। खराब मौसम के चलते धुंध के आगोश में सिमटा शिमला शहर मेधावी बच्चों के उत्साह को कम नहीं कर सका। कई छात्र-छात्राएं जहां अपने अभिभावकों और छोटे भाई-बहनों के साथ आए वहीं कुछ विद्यार्थी शिक्षकों के साथ समारोह स्थल में पहुंचे। अभिभावकों ने यादगार लम्हों को कैमरे में कैद कर लिया। कई अभिभावक अपने टॉपर बच्चों की वजह से पहली बार शिमला आए थे।

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अभिभावकों ने ये कहा

मेधावियों के अभिभावक। - फोटो : अमर उजाला
मंडी से दसवीं के टॉपर हार्दिक की माता रीना कुमारी ने बताया कि वह पहली बार अपने बेटे की वजह से शिमला आएं हैं। मुख्यमंत्री से पुरस्कार की बात सुनकर वह शिमला आने के लिए कई दिनों से उत्सुक थीं। बेटे को पुरस्कार पाकर देखते हुए खुशी हुई। अभिभावक हर्षलता ने बताया कि बेटी को सम्मानित होते देख गर्व से सीना चौड़ा हो गया। ऐसे पुरस्कार मिलने से बच्चों का हौसला बढ़ता है। उम्मीद है कि पुरस्कार पाने के बाद बेटी और मेहनत कर जिंदगी में सफल होगी।

पालमपुर से अभिभावक मनू कपूर ने बताया कि बेटी को सीएम से सम्मानित होते हुए देखने के लिए आठ घंटे का सफर तय कर आए हैं। उन्होंने कहा कि बेटी यूपीएससी क्लीयर करना चाहती है। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। आनी से आई बारहवीं की टॉपर आंचल कश्यप की बहन साक्षी ने बताया कि वह घर से दूर रहकर शिमला के आरकेएमवी में पढ़ाई कर रही है। आंचल बहुत मेहनती है और सिविल सर्विसेज में जाना चाहती है।

हमीरपुर के चमन धीमान ने बताया कि बेटी ने दसवीं कक्षा में टॉप कर नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री उनके क्षेत्र से है और उनके हाथों पुरस्कृत होते हुए देख गर्व हो रहा है। बेटी भी बहुत खुश है। दसवीं में छठा रैंक पाने वाली अंशुल की माता कमलेश ने कहा कि बेटी को सम्मानित होते देखने का पल हमेशा याद रहेगा। अंशुल के दादा रंगीला राम ने बताया कि पोती का सम्मान पाकर देख उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है।

ऊना से नौ घंटे का सफर कर आए अनिल कुमार ने बताया कि पल्लवी को सम्मान मिलते हुए देख गर्व हुआ। बेटी आगे किस विषय में पढ़ाई करना चाहती है यह निर्णय उसी पर छोड़ दिया है। रंजू कायथ ने बताया कि बेटी के सम्मान मिलने की खबर मिलते ही खुशी का ठिकाना नहीं था। यह लम्हा जीवन भर याद रहेगा।

बेटी ने जो खुशी दी है, वह उन्हें उम्र भर याद रहेगी। इस लम्हे को कैमरे में कैद कर लिया। दसवीं की टॉपर आराध्या की माता शशिवाला ने बताया कि वह शिक्षिका है और पिता डॉक्टर हैं। उन्होंने कि बेटी को सम्मान मिलते देखना गर्व का क्षण रहा। बेटी ने जो खुशी दी है कि वह हमेशा याद रहेगी।
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मेधावी बोले- हर जिले में खोले जाए कोचिंग सेंटर

विद्यार्थी - फोटो : अमर उजाला
मेधावी छात्र सम्मान समारोह में आए विद्यार्थियों ने सरकार से हर जिले में कोचिंग सेंटर खोलने का आग्रह किया। जिससे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सुविधा हो सके। मेधावियों ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने के दौरान मन में प्रश्न तो कई आए लेकिन पूछ नहीं पाए। अगर भविष्य में मौका मिला तो सीएम के सामने शंकाओं को दूर करेंगे।

शिमला आना पड़ता है परीक्षा की कोचिंग लेने के लिए
मंडी में कोचिंग सेंटरों की कमी है। ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को शिमला आना पड़ता है। सीएम से बात करनी थी पर कर नहीं पाई। भविष्य में मौका मिला तो जरूर मन के सवालों को सामने रखूंगी।- चेतना कुमारी, बारहवीं टॉपर, मंडी।

हर स्कूल में हो उच्च स्तरीय प्रयोगशाल
क्षेत्र में विज्ञान प्रयोगशाला की कमी है। जिसकी वजह से विद्यार्थी लैब में होने वाले प्रयोगों को सीखने में पिछड़ जाते हैं। सरकार चाहे तो यह स्थिति सुधार सकती है। हर स्कूल में उच्च स्तरीय लैब खोली जानी चाहिए। -शिवेंद्र शर्मा, दसवीं टॉपर, हमीरपुर

फीस के मुकाबले सुविधा नहीं मिलती
पहले ही कोचिंग सेंटर कम हैं। उनमें फीस के मुकाबले सुविधा नहीं दी जाती। इसलिए मजबूरन दूसरी बाहरी राज्यों में कोचिंग के लिए जाना पड़ता है। हिमाचल में बेहतर संस्थान खुले तो विद्यार्थियों को फायदा होगा।- वंशिका धीमान, बारहवीं टॉपर, ऊना

सम्मान पाकर मिली खुशी
प्रदेश मुख्यमंत्री के हाथों से मेधावी का सम्मान पाकर बहुत खुशी मिली है। इसके लिए सात से आठ घंटे का सफर तय करके शिमला पहुंची हूं। भविष्य में मैं भी अपने पिता की तरह हिंदी प्राध्यापिका बनना चाहती हूं।- दीक्षा कठियाल, दसवीं टॉपर, हमीरपुर

भविष्य में चुनना चाहती है बैकिंग का क्षेत्र
कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े मंच पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अभी कांगड़ा से बीबीए की पढ़ाई कर रही हूं। भविष्य में बैंकिग के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है। सम्मान पाकर हौसला बढ़ा है।- कनिष्का पटियाल, बारहवीं टॉपर, कांगड़ा

सीए बनना चाहती है वृदा
बारहवीं विज्ञान संकाय की मेरिट में पहला रैंक पाने वाली वृंदा ने कहा कि वह आगे चलकर सीए बनना चाहती हैं। आज सम्मनित होने से आगे बढ़ने के लिए और ज्यादा हिम्मत मिली है। अब और मेहनत करूंगी।- वृंदा, बारहवीं टॉपर, सिरमौर
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