मंडी से दसवीं के टॉपर हार्दिक की माता रीना कुमारी ने बताया कि वह पहली बार अपने बेटे की वजह से शिमला आएं हैं। मुख्यमंत्री से पुरस्कार की बात सुनकर वह शिमला आने के लिए कई दिनों से उत्सुक थीं। बेटे को पुरस्कार पाकर देखते हुए खुशी हुई। अभिभावक हर्षलता ने बताया कि बेटी को सम्मानित होते देख गर्व से सीना चौड़ा हो गया। ऐसे पुरस्कार मिलने से बच्चों का हौसला बढ़ता है। उम्मीद है कि पुरस्कार पाने के बाद बेटी और मेहनत कर जिंदगी में सफल होगी।
पालमपुर से अभिभावक मनू कपूर ने बताया कि बेटी को सीएम से सम्मानित होते हुए देखने के लिए आठ घंटे का सफर तय कर आए हैं। उन्होंने कहा कि बेटी यूपीएससी क्लीयर करना चाहती है। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। आनी से आई बारहवीं की टॉपर आंचल कश्यप की बहन साक्षी ने बताया कि वह घर से दूर रहकर शिमला के आरकेएमवी में पढ़ाई कर रही है। आंचल बहुत मेहनती है और सिविल सर्विसेज में जाना चाहती है।
हमीरपुर के चमन धीमान ने बताया कि बेटी ने दसवीं कक्षा में टॉप कर नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री उनके क्षेत्र से है और उनके हाथों पुरस्कृत होते हुए देख गर्व हो रहा है। बेटी भी बहुत खुश है। दसवीं में छठा रैंक पाने वाली अंशुल की माता कमलेश ने कहा कि बेटी को सम्मानित होते देखने का पल हमेशा याद रहेगा। अंशुल के दादा रंगीला राम ने बताया कि पोती का सम्मान पाकर देख उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
ऊना से नौ घंटे का सफर कर आए अनिल कुमार ने बताया कि पल्लवी को सम्मान मिलते हुए देख गर्व हुआ। बेटी आगे किस विषय में पढ़ाई करना चाहती है यह निर्णय उसी पर छोड़ दिया है। रंजू कायथ ने बताया कि बेटी के सम्मान मिलने की खबर मिलते ही खुशी का ठिकाना नहीं था। यह लम्हा जीवन भर याद रहेगा।
बेटी ने जो खुशी दी है, वह उन्हें उम्र भर याद रहेगी। इस लम्हे को कैमरे में कैद कर लिया। दसवीं की टॉपर आराध्या की माता शशिवाला ने बताया कि वह शिक्षिका है और पिता डॉक्टर हैं। उन्होंने कि बेटी को सम्मान मिलते देखना गर्व का क्षण रहा। बेटी ने जो खुशी दी है कि वह हमेशा याद रहेगी।
मेधावी छात्र सम्मान समारोह में आए विद्यार्थियों ने सरकार से हर जिले में कोचिंग सेंटर खोलने का आग्रह किया। जिससे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सुविधा हो सके। मेधावियों ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने के दौरान मन में प्रश्न तो कई आए लेकिन पूछ नहीं पाए। अगर भविष्य में मौका मिला तो सीएम के सामने शंकाओं को दूर करेंगे।
शिमला आना पड़ता है परीक्षा की कोचिंग लेने के लिए
मंडी में कोचिंग सेंटरों की कमी है। ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को शिमला आना पड़ता है। सीएम से बात करनी थी पर कर नहीं पाई। भविष्य में मौका मिला तो जरूर मन के सवालों को सामने रखूंगी।- चेतना कुमारी, बारहवीं टॉपर, मंडी।
हर स्कूल में हो उच्च स्तरीय प्रयोगशाल
क्षेत्र में विज्ञान प्रयोगशाला की कमी है। जिसकी वजह से विद्यार्थी लैब में होने वाले प्रयोगों को सीखने में पिछड़ जाते हैं। सरकार चाहे तो यह स्थिति सुधार सकती है। हर स्कूल में उच्च स्तरीय लैब खोली जानी चाहिए। -शिवेंद्र शर्मा, दसवीं टॉपर, हमीरपुर
फीस के मुकाबले सुविधा नहीं मिलती
पहले ही कोचिंग सेंटर कम हैं। उनमें फीस के मुकाबले सुविधा नहीं दी जाती। इसलिए मजबूरन दूसरी बाहरी राज्यों में कोचिंग के लिए जाना पड़ता है। हिमाचल में बेहतर संस्थान खुले तो विद्यार्थियों को फायदा होगा।- वंशिका धीमान, बारहवीं टॉपर, ऊना
सम्मान पाकर मिली खुशी
प्रदेश मुख्यमंत्री के हाथों से मेधावी का सम्मान पाकर बहुत खुशी मिली है। इसके लिए सात से आठ घंटे का सफर तय करके शिमला पहुंची हूं। भविष्य में मैं भी अपने पिता की तरह हिंदी प्राध्यापिका बनना चाहती हूं।- दीक्षा कठियाल, दसवीं टॉपर, हमीरपुर
भविष्य में चुनना चाहती है बैकिंग का क्षेत्र
कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े मंच पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अभी कांगड़ा से बीबीए की पढ़ाई कर रही हूं। भविष्य में बैंकिग के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है। सम्मान पाकर हौसला बढ़ा है।- कनिष्का पटियाल, बारहवीं टॉपर, कांगड़ा
सीए बनना चाहती है वृदा
बारहवीं विज्ञान संकाय की मेरिट में पहला रैंक पाने वाली वृंदा ने कहा कि वह आगे चलकर सीए बनना चाहती हैं। आज सम्मनित होने से आगे बढ़ने के लिए और ज्यादा हिम्मत मिली है। अब और मेहनत करूंगी।- वृंदा, बारहवीं टॉपर, सिरमौर