बड़गांव आंगनबाड़ी केंद्र हटाने का मामला।
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के विकास खंड झंडूता की बड़गांव पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र को नहीं हटाया जाएगा। मामला उजागर होने के बाद उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने हस्ताक्षेप करते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी झंडूता को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। पंचायत से शराब ठेका खुलने के बारे में आपत्तियां मांगी गई हैं। बड़गांव पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र से करीब 20 मीटर दूर साल 2019 से शराब ठेका चल रहा है। बीते वीरवार को ठेके को हटाने की जगह आंगनबाड़ी केंद्र को ही दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश जारी कर दिए गए। अमर उजाला ने इस मामले को शुक्रवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया।
इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। ठेके का विरोध लंबे समय चल रहा है। 23 मई को पंचायत ने भी आबकारी एवं कराधान विभाग को इस बारे में अवगत करवाया था। यदि विभाग कार्रवाई करता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। 1 जून को आंगनबाड़ी केंद्र में आ रहे बच्चों के अभिभावकों और आंगनबाड़ी केंद्र के लाभार्थियों की बैठक हुई। इसमें भी शराब के ठेके को हटाने के लिए प्रस्ताव डाला गया। बाल विकास परियोजना अधिकारी झंडूता की ओर से 3 मई को पत्र संख्या 1-13/2006-07 के तहत आबकारी एवं कराधान विभाग घुमारवीं को ठेका हटाने के लिए कहा था।
विभाग की ओर से जब ठेका नहीं हटाया तो बाल विकास परियोजना अधिकारी ने राजनीतिक दबाव के कारण शराब ठेके को हटाने के बजाय अपने ही फैसले को दरकिनार कर 1 माह बाद 5 जून को केंद्र को फ्टि करने के आदेश पत्र संख्या 1-13/2006-07 झंडूता 133 के तहत जारी किए। जिला परियोजना अधिकारी हरीश मिश्रा ने बताया कि उपायुक्त ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। पंचायत से आपत्ति पत्र मांगा है। आपत्ति पत्र मिलने के बाद ठेके को हटाने बारे कार्रवाई की जाएगी।
शराब ठेका नहीं, आंगनबाड़ी केंद्र हटा रहे, किस दिशा में समाज को ले जा रही सरकार
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की नीतियों पर तंज कसा। कहा कि बिलासपुर में आंगनबाड़ी केंद्र के बगल में शराब का ठेका खोल दिया। बच्चों के माता-पिता ने इसका विरोध किया तो सरकार ने कहा, ठेका बंद नहीं हो सकता, आप आंगनबाड़ी कहीं और ले जाइए। सरकार को सोचना होगा कि वह समाज को कहां ले जा रही है। जयराम ने गाड़ागुशैनी में जनसभा में कहा कि सरकार कह रही है कि विकास के लिए पैसे नहीं हैं। लेकिन हर दिन हिमाचल की जनता पर बोझ डाले जा रही है। छह-छह सीपीएस बना दिए हैं। अपने चार-चार मित्रों को कैबिनेट रैंक दे दिया। अब एयरक्राफ्ट भी ले रहे हैं। हिमाचल में एयरक्राफ्ट की क्या जरूरत है।