राजधानी शिमला में पीलिया से एक के बाद एक हो रही मौतों पर शिमला बार एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपना लिया है। मंगलवार को शिमला बार एसोसिएशन जनहित में उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना- प्रदर्शन करेगी और इसके बाद प्रदेश सचिवालय तक पैदल मार्च किया जाएगा।
सचिवालय के बाद राज्यपाल भवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। पीलिया की वजह से तीन अधिवक्ताओं की मौत भी हो चुकी है। एसोसिएशन ने सरकार से पीलिया को महामारी घोषित करने की मांग की है। पीलिया की वजह से जिस घर में मौत हुई है, उनके परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।
नगर निगम के खिलाफ तुरंत इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि शहर में पीलिया के लिए नगर निगम भी आईपीएच की तरह जिम्मेदार है, वह अपनी जिम्मेदारी ने नहीं बच सकता। नगर निगम पानी की सप्लाई शहर में करता है और उपभोक्ता से पानी का बिल वसूल करता है, लिहाजा वो भी बराबर का दोषी है।
उनके खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। शिमला शहर को साफ पानी जल्द से जल्द प्रदेश सरकार मुहैया करवाए ताकि भविष्य में इस तरह की बीमारी न फैले। एसआईटी की अब तक की जांच से वह संतुष्ट नहीं है। क्योंकि एसआईटी ने अभी तक प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और नगर निगम के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
एसोसिएशन के महासचिव संजय रांटा ने कहा कि पीलिया की वजह से उनके तीन साथी जान गंवा बैठे हैं। प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के एस बन्याल ने जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों से आग्रह किया कि वे मंगलवार को 10 बजे हाईकोर्ट में उपस्थित होकर आम राय से सरकार के प्रति रोष जताने के लिए एकत्रित हों।