ऊपरी शिमला में सेब से हर साल होने वाली कमाई करीब चार हजार करोड़ आंकी गई है। आखिर इतने हजारों करोड़ कहां चले जाते हैं? अगर यह भी मान लें कि इसमें से दो हजार करोड़ बगीचों, ट्रांस्पोर्टेशन और बागवानी से ही संबंधित दूसरे कामों में खर्च हो जाते हैं तो भी बागवानों की जेब में करीब दो हजार करोड़ आता है। अब यह पैसा कहां खर्च होता है? क्या बैंकों में जमा होता है?
या कोई प्रॉपर्टी खरीदी जाती है? या फिर इस टैक्स फ्री कमाई का कहीं दूसरी जगह इस्तेमाल होता है। एडीजीपी (कानून व्यवस्था) संजय कुंडू ने यह सवाल शिमला पुलिस की मासिक अपराध बैठक में मौजूद पुलिस अफसरों से किए। इसके सवाल में कई अफसरों ने कहा कि ज्यादातर रकम राज्य से बाहर प्रापर्टी में खर्च की जाती है।
लेकिन क्या हर सीजन में एक बागवान प्रॉपर्टी में ही निवेश करता होगा, यह भी संभव नहीं है। ऊपरी शिमला में ऐसा भी कोई बागवान उभर कर नहीं आया है, जिसने सेब के पैसों की कमाई से कोई बड़ा व्यापार शुरू किया हो और उसकी गिनती टॉप के व्यवसायियों में हो।