अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड बीते साल के मुकाबले प्रतिकिलो 19 रुपये ज्यादा दाम पर सेब खरीदेगी। कंपनी गुरुवार से शिमला जिले के ठियोग स्थित सैंज और रोहड़ू के मेंहदली कलेक्शन सेंटर में खरीद शुरू करेगी, जबकि रामपुर के बिथल प्लांट पर शुक्रवार 25 अगस्त से खरीद शुरू होगी। इस सीजन में कंपनी ने 25,000 मीट्रिक टन सेब खरीदने का लक्ष्य रखा है। कंपनी लार्ज, मीडियम, स्माल श्रेणी का सेब इस सीजन में 95 रुपये प्रतिकिलो के दाम पर खरीदेगी। बीते साल यह सेब 76 रुपये और 2021 में 72 रुपये प्रतिकिलो बिका था। 95 रुपये प्रतिकिलो कंपनी की ओर से घोषित शुरुआती दाम हैं, आमतौर पर 7 से 10 दिन में दाम पुनर्निर्धारित कर दिया जाता है।
हिमाचल में प्राकृतिक आपदा के मद्देनजर कंपनी ने इस साल कलेक्शन सेंटरों (संग्रह केंद्रों) पर रिजेक्शन (रंग और आकार के मानकों पर खरा न उतरने पर अस्वीकार) न करने का फैसला लिया है। कंपनी ने बागवानों से आग्रह किया है कि सड़े हुए या पक्षियों द्वारा खाए गए सेब प्लांट पर बेचने न लाएं, क्योंकि ऐसा सेब कंपनी नहीं खरीदेगी। सैंज और मेंहदली में अदाणी के 7500-7500 मीट्रिक टन क्षमता के प्लांट हैं, जबकि बिथल में 10,000 मीट्रिक टन क्षमता का प्लांट है। कंपनी का दावा है कि 95 रुपये प्रतिकिलो अब तक का सबसे अधिक दाम है। बागवानों का सेब क्रेट में लिया जाता है, इसलिए पैकिंग और कार्टन का खर्चा नहीं होता। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन पर अनुदान भी दिया जाता है।
मंडियों में 80 से 120 चल रहे सेब के औसत दाम
इन दिनों मंडियों में सेब के औसत दाम 80 से 120 रुपये किलो चल रहे हैं। असाधारण गुणवत्ता का सेब 190 रुपये किलो, जबकि कम गुणवत्ता वाला हल्का सेब 30 से 40 रुपये किलो भी बिक रहा है।
कंपनियों की मनमानी पर सरकारी कमेटी की नजर
प्रदेश में सेब खरीदने वाली कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतों में कटौती कर देती हैं। कंपनियों की मनमानी पर नजर रखने और कार्रवाई के लिए बागवानी मंत्री के आदेशों पर उपमंडलाधिकारियों की अगुवाई में गठित कमेटियां नजर रखेंगी। ये कमेटियां सेब खरीदने वाली कंपनियों द्वारा फल की गुणवत्ता जांचने के लिए निर्धारित मापदंडों और वैज्ञानिक परीक्षणों की जांच भी करेंगी।