वह कहते हैं कि उनके पिता ही हमेशा उनको सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। यही नहीं तैयारी में भी उसकी हर तरह से मदद करते थे। कहा कि आज पिता भले ही साथ नहीं है, लेकिन उनके सपने को पूरा करने पर गर्व महसूस हो रहा है।
आयुष कहते हैं कि उन्होंने आज जो मुकाम हासिल किया है उसमें उनके मामा अतुल वर्मा, बहन इशिता सिन्हा और बहनोई मोहित प्रधान ने काफी सहयोग दिया। कहा कि पिता की मौत के बाद भी उनकी माता अलका वर्मा ने कभी उन्हें अपने लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।
यही नहीं, इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी खुद से दूर दिल्ली में ही रहकर पढ़ने भेज दिया। वर्तमान में अलका सेंट बीट्स में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर इकोनामिक्स विषय पढ़ाती हैं।