रानी झांसी पार्क से गायब हुआ बच्चों का प्यारा मिकी माउस बाउंसी लौट आया है। सोमवार को ‘अमर उजाला’ में ‘नगर निगम का मिकी माउस बाउंसी गायब, बच्चे मायूस’ शीर्षक से खबर छपने के बाद लापरवाही की नींद सोया नगर निगम एकाएक हरकत में आया। आनन फानन में स्टोर में रखे गए बाउंसी को बाहर निकाल कर मरम्मत करवाई गई और इसे दोबारा रानी झांसी पार्क में स्थापित कर दिया गया। बाउंसी के वापस आने से बच्चों के चहरों पर रौनक लौट आई है। बीते करीब एक महीने से बाउंसी नगर निगम के स्टोर में पड़ा था।
नगर निगम की मेयर, डिप्टी मेयर, कमिश्नर और पार्षदों ने चार महीने पहले रानी झांसी पार्क में लगाए गए बाउंसी का उद्घाटन किया था। पिछले महीने यह बाउंसी फट गया और इसे पार्क से हटा कर नगर निगम ने स्टोर में डाल दिया। शहर के बच्चे अपने पसंदीदा बाउंसी को पार्क में न पा कर निराश हो रहे थे।
एक से दो बजे लंच टाइम में बाउंसी की भी ब्रेक
बाउंसी में 10 मिनट खेलने के लिए नगर निगम बच्चों से 10 रुपये शुल्क वसूलता है। पर्ची काटने के लिए यहां एक कर्मी तैनात किया गया है। नगर निगम को बाउंसी से अच्छी खासी कमाई हो रही है बावजूद इसके दोपहर एक से दो बजे तक बाउंसी को बंद कर इसकी हवा निकाल दी जाती है। इस दौरान बच्चों को बाउंसी में खेलने के लिए एक घंटा इंतजार करना पड़ता है।
मरम्मत कर लगा दिया बाउंसी : डिप्टी मेयर
नगर निगम के डिप्टी मेयर राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि रानी झांसी पार्क में लगाए गए मिकी माउस बाउंसी की मरम्मत कर इसे वापस लगा दिया है। लंच टाइम में भी बच्चों को बाउंसी की सुविधा मिले इसके लिए यहां एक और कर्मचारी तैनात करने का प्रयास किया जाएगा।
5 घंटे में कमाए 1330 रुपये
रानी झांसी पार्क में सोमवार सुबह करीब ग्यारह बजे मिकी माउस बाउंसी लगा दिया गया। ग्यारह से एक बजे और लंच ब्रेक के बाद दो से पांच बजे तक पांच घंटे में 133 बच्चों ने बाउंसी में खेलने का लुत्फ उठाया। महज पांच घंटे में निगम को 1330 रुपये कमाई हुई। बाउंसी से महीने में नगर निगम को औसतन 45 से 50 हजार रुपये कमाई होती है।