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गुड़िया प्रकरण पर जिप बैठक में हंगामा, वॉकआउट

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। जिला परिषद की बैठक में कोटखाई के गुड़िया केस पर जमकर हंगामा बरपा। मामले की जांच करने वाले पुलिस अफसरों और उपायुक्त को निशाने पर लेते हुए जिप सदस्यों ने इनकी बर्खास्तगी की मांग कर डाली। सदन में जब इस मसले पर कोई बात नहीं बनी तो आधा दर्जन सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया। कोटखाई के थरोला वार्ड से जिप सदस्य नीलम सरैक ने सबसे पहले ये मामला उठाया। पूछा कि आखिर उपायुक्त घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार के घर क्यों नहीं पहुंचे, क्यों परिजनों से मिलने में 15 दिन लग गए। यदि डीसी समय पर पीड़ित परिवार के घर जाते तो न चक्का जाम होता और न ही थाना फूंकने की नौबत आती। उन्होंने सरकार से डीसी को बर्खास्त करने की मांग की। कहा कि इस मामले में सुस्ती बरतने वाले डीजीपी, आईजी और अन्य अफसरों को सस्पेंड नहीं बल्कि बर्खास्त किया जाना चाहिए। इन सदस्यों ने एसआईटी में शामिल हर अफसर की सीबीआई जांच की भी मांग की। सदन में तय हुआ कि इसे स्पेशल एजेंडा बनाकर चर्चा की जाएगी। लेकिन हंगामा शांत नहीं हुआ और जिप सदस्य नीलम सरैक, इंदू वर्मा, डीआर हस्टा, सीआर आजाद, रेखा मोगटा, वंदना मेहता, रीना ठाकुर, अरविंद धीमान और मदनलाल मेहता ने वॉकआउट कर दिया।
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पुलिस अफसर के अभद्र व्यवहार पर गरमाया सदन
जिप सदस्या रीना ठाकुर के साथ पुलिस अफसर के किए गए अभद्र व्यवहार के मामले पर भी सदन गरमा गया। सदस्य दलीप कायथ ने पूछा कि ये शर्म की बात है कि अफसर के खिलाफ एक साल बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। क्षेत्र से विधायक भी खुद महिला हैं मगर वे भी सदस्य को न्याय नहीं दिला पाईं। वहीं, सदस्या रीना ने इस सवाल को सूची से हटवा दिया। कहा कि जब अफसर पर कार्रवाई होनी ही नहीं है तो इस पर चर्चा का क्या फायदा।
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सैंज में पुलिस वाले भेजे, तो गए कहां
सैंज में पुलिस की तैनाती पर भी हंगामा हुआ। शिमला पुलिस की ओर से डीएसपी बलवीर जसवाल ने बताया कि यहां के लिए तीन पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। इस पर वार्ड सदस्य रेखा मोगटा ने कहा कि फील्ड में एक भी पुलिस कर्मी नहीं है। आखिर वहां भेजे पुलिस वाले कहां चले गए। डीएसपी ने कहा कि यदि जवान वहां नहीं पहुंचे तो उनके खिलाफ जांच होगी। बाकी सदस्य इससे भड़क गए और कहने लगे कि पुलिस अफसरों को पता ही नहीं कि स्टाफ फील्ड में है भी या नहीं।
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