हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) बसों में सफर करना खतरे से खाली नहीं। एचआरटीसी में 80 से ज्यादा ड्राइवर ऐसे हैं, जिन्हें दृष्टि दोष है। बावजूद इसके एचआरटीसी ने इन ड्राइवरों के हाथों में स्टेयरिंग थमाया हुआ है। रोड सेफ्टी के तहत प्रदेश भर में लगाए गए स्वास्थ्य जांच शिविरों में इसका खुलासा हुआ है।
जांच शिविरों में करीब एक हजार ड्राइवरों और कंडक्टरों की आंखें और कान जांचे गए। जांच में 80 से ज्यादा ड्राइवरों जबकि एक दर्जन कंडक्टरों में दृष्टि दोष पाया गया है। कई ड्राइवरों को डॉक्टरों ने बसें न चलाने की हिदायत भी दी है। कइयों को तुरंत ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई है। प्रदेश सरकार ने 25 जनवरी तक इसकी रिपोर्ट मांगी है।
पढ़िए कहां कितने चालकों की आंखें खराब
कांगड़ा जिले में सर्वाधिक 70 ड्राइवरों-कंडक्टरों की आंखें जांची गईं। यहां 20 ड्राइवरों में दृष्टि दोष पाया गया। सोलन में 50 में से 20, शिमला में 376 में से 13, मंडी में 109 में से 10, कुल्लू में 135 में से 3, नाहन में 210 में से 21 ड्राइवरों में दृष्टि दोष पाया गया। बड़ी बात यह है कि कुल्लू में 135 ड्राइवरों की जांच के दौरान तीन की आंखों में मोतियाबिंद पाया गया।
डॉक्टरों ने इन ड्राइवरों को तुरंत ऑपरेशन कराने की सलाह दी है। इसी तरह हमीरपुर में 40 ड्राइवरों में से 5 की आंखों में एलर्जी, आधे सिर में दर्द पर डॉक्टरों ने चश्मा लगाने की सलाह दी। शिविर में ड्राइवरों की टांगों और पीठ में दर्द के मामले भी सामने आए हैं।
परिवहन विभाग के एसटीए सचिव संजय शर्मा का कहना है कि रोड सेफ्टी के तहत प्रदेश भर में शिविर लगाए गए थे। डाटा जुटाया जा रहा है। सभी आरटीओ से 25 जनवरी तक रिपोर्ट जमा करने को कहा है। जिन ड्राइवरों की आंखें खराब हैं, उन्हें बसें चलाने या न चलाने का फैसला बैठक में लिया जाएगा।