प्रदेश में इसी साल अब तक 102 बस हादसे हो चुके हैं, इनमें 587 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कई लोग अपाहिज हो चुके हैं। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि सड़कों पर बसें कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर दौड़ाई जा रही हैं। ऐसे में हादसे होना स्वाभाविक है। राज्य में बस हादसों का सिलसिला आखिर कब रुकेगा, यह चिंता का विषय बन गया है? इसी साल अब तक हुए हादसों में सर्वाधिक 71 निजी बसें दर्घटनाग्रस्त हुई हैं।
वाहन दुर्घटना में इस साल 587 लोगों की मौत हो चुकी है। जनवरी 2014 से लेकर अब तक हिमाचल में लगभग 1450 से ज्यादा वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इनमें 2600 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इस साढ़े सात माह की अवधि में करीब शिमला में सर्वाधिक 89 लोगों की जानें जा चुकी हैं।
सिरमौर जिले में 88 लोग प्राण गंवा चुके हैं। किन्नौर जिले में भी 47 लोगों की की मौत हो चुकी है। प्रदेश का ऐसा कोई जिला नहीं, जहां लोगों की दुर्घटनाओं में जान न गई हो। यह जरूर है कि लाहौल स्पीति, हमीरपुर, किन्नौर और कुल्लू जिलों में ही अपेक्षाकृत कम हादसे हुए हैं।