अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दंत चिकित्सा महाविद्यालय में मुंह के जबड़े के एक्सरे नहीं हो रहे हैं। एक्सरे रोगियों को निजी लैबों में महंगी दरों पर करवाने पड़ रहे हैं। रोगियों को अस्पताल में होने वाले इस एक्सरे के लिए सात सौ रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि अस्पताल से मरीजों को दोनों ओर तीन किलोमीटर का चक्कर भी अतिरिक्त लगाना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती ट्रामा मरीजों को सबसे अधिक परेशानी पेश आ रही है। जबकि अस्पताल परिसर के बाहर से जानी वाली टैक्सियों में अतिरिक्त रुपये भी उन्हें खर्च करने पड़ रहे हैं।
डेंटल कॉलेज के ओएमडीआर विभाग में ट्रामा और अन्य मरीजों के होने वाले ओपीजी (आर्थोपेनटोमोरग्राम) टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। जुलाई 2017 से मशीन खराब पड़ी है। अस्पताल में औसतन रोजाना बीस से तीस मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन जब से टेस्ट बंद हुए तब से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतें पेश आ रही हैं। प्रबंधन भी अपने स्तर पर किसी भी तरह के उचित प्रयास नहीं कर पाया है।
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- विभागीय पक्ष -
विभाग में जल्द स्थापित हो जाएगी मशीन
विभाग में मशीन जल्द स्थापित की जाएगी। सरकार के समक्ष भी मामला ध्यान में है वह भी काफी प्रयासरत है। मशीन के लगने के बाद मरीजों को परेशानी नहीं आएंगी।
- डॉ. आरपी लुथरा
- प्राचार्य, डेंटल कॉलेज शिमला
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निजी लैब में चार हजार रुपये चुकाए
14 साल के विनोद के जबड़े का ऑपरेशन हुआ है। चिकित्सकों ने परिजनों को एक्सरे करवाने के लिए कहा। इस पर चार हजार रुपये का खर्चा आया। जबकि अस्पताल में 100 रुपये में एक्सरे हो जाता है।
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बाहर नहीं करवा सकते एक्सरे
कुपवी के बिलम सिंह गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। बच्चे का एक्सरे करवाना था, लेकिन पैसे के अभाव के कारण काफी परेशानी आ रही है। बिलम ने बताया कि वे बाहर एक्सरे नहीं करवा सकते हैं।