दशहरा उत्सव समिति के रजिस्टर में 281 देवी-देवताओं का पंजीकरण हुआ है, जबकि 2019 में 282 देवी-देवताओं ने भाग लिया था। 2018 को 264, 2017 में यह संख्या में 249 और 2016 में 226 देवी-देवताओं ने भाग लिया था। इस साल उत्सव में रिकॉर्ड 281 देवी-देवताओं में 157 गैर माफीदार और 124 माफीदार देवता शामिल हुए है।
कोरोना काल के बीच हिमाचल प्रदेश के कुल्लू दशहरा में 281 देवी-देवता पहुंचे हैं। दशहरा उत्सव समिति और जिला देवी-देवता कारदार संघ को 200 देवी देवताओं को आने की उम्मीद थी। 281 देवी देवताओं के आने से अठारह करड़ू की सौह का माहौल देवमयी हो गया है। बाह्य सराज निरमंड और आनी से लेकर ऊझी घाटी मनाली तक सोने-चांदी के मुख मोहरे तथा आभूषण से सजे देवरथों से रघुनाथ की नगरी ढालपुर स्वर्गलोक में तबदील हो गई है। दशहरा उत्सव समिति के रजिस्टर में 281 देवी-देवताओं का पंजीकरण हुआ है, जबकि 2019 में 282 देवी-देवताओं ने भाग लिया था। 2018 को 264, 2017 में यह संख्या में 249 और 2016 में 226 देवी-देवताओं ने भाग लिया था। इस साल उत्सव में रिकॉर्ड 281 देवी-देवताओं में 157 गैर माफीदार और 124 माफीदार देवता शामिल हुए है।
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पिछले साल कोरोना के चलते करीब एक दर्जन देवी-देवता दशहरा में पहुंचे थे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि कहा कि दशहरा उत्सव में देवी देवताओं की संख्या बढ़ रही है। इस साल कोरोना के बावजूद दशहरा में 281 देवता पहुंचे हैं। कहा कि नजराना राशि न मिलने पर भी इतनी संख्या में देवताओं का दशहरा में आना देव समाज के लिए अच्छी बात है। दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में इस साल 281 देवी-देवता पहुंचे हैं। इसमें उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में देवलुओं को किसी तरह की समस्या न हो इसके लिए प्रशासन की ओर से सभी प्रबंध किए गए हैं।