शहर के बीचोंबीच करोड़ों रुपये की जमीन चुपचाप आरएसएस से जुड़ी संस्था को देकर भाजपा शासित नगर निगम विवादों में फंस गया है। नेशनल हाइवे से सटी करीब 30 बीघा इस जमीन की वर्तमान कीमत 25 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं, निगम 34 में से 19 पार्षदों के विरोध के बावजूद इस जमीन को संस्था के हवाले करने जा रहा है। निगम प्रशासन का दावा है कि यह जमीन एमसी की नहीं है और निगम सिर्फ एनओसी दे रहा है।
इसके अलावा 29 जून की मासिक बैठक में इस प्रस्ताव को पारित भी किया जा चुका है। लेकिन 19 पार्षदों के लिखित विरोध के बाद निगम का यह दावा सवालों के घेरे में आ गया है। प्रस्ताव के विरोध में हस्ताक्षर करने वालों में 15 विपक्षी जबकि चार भाजपा के पार्षद हैं।
इनका कहना है कि ज्यादातर पार्षदों की सहमति न होने के बावजूद यह प्रस्ताव पारित कैसे हो गया। 29 जून के जिस सदन में यह प्रस्ताव पारित हुआ, उसमें एक भी विपक्षी पार्षद मौजूद नहीं था। सदन में जो भाजपा पार्षद थे, उनमें से भी कुछेक पार्षदों ने इस पर सहमति नहीं दी थी। सदन में मौजूद रहीं भाजपा पार्षद आरती चौहान का कहना है कि ऐसे किसी प्रस्ताव पर उन्होंने मंजूरी नहीं दी।
दो महीने के भीतर ही संस्था को दे दी जमीन
संस्था को 22669.38 वर्ग मीटर जमीन टूटीकंडी वार्ड में दी जा रही है। निगम के अनुसार यह सरकारी जमीन है जो वर्तमान में चरागाह के तौर पर इस्तेमाल हो रही है। संस्था की ओर से इसी साल 30 अप्रैल को संस्थान की गतिविधियां चलाने के लिए इस जमीन को उपलब्ध करवाने के लिए आवेदन किया था।
निगम के संयुक्त आयुक्त की ओर से जमीन संबंधी एनओसी देने के प्रस्ताव को जीएफसी की बैठक में रखा गया। यहां ज्यादातर पार्षदों को प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी। ऐसे में इसे पारित कर दिया गया। 29 जून को मासिक बैठक में ज्यादातर पार्षद सदन में नहीं थे। इसी बीच निगम ने चुपचाप यह प्रस्ताव पारित भी करवा लिया।
लीज पर जमीन पाने के लिए पहले यह एनओसी जरूरी थी। उधर, नगर निगम पार्षदों के पार्क और पार्किंग के प्रस्तावों को तो महीनों तक लटकाता है, लेकिन संस्था को दो महीने में एनओसी दे दी। पार्षद सवाल इसलिए भी उठा रहे हैं कि निगम खुद भी वन विभाग से इस जमीन की मांग कर पार्क के लिए इस्तेमाल कर सकता था।
संस्था को जमीन देने पर उठे सवाल
नाभा इस्टेट में भी एक और संस्था विवेकानंद केंद्र को 257 वर्गमीटर जमीन देने पर विपक्षी पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय पार्षद सिमी नंदा के अनुसार इस जमीन को जनता के फायदे के लिए इस्तेमाल न कर निगम संस्था के हवाले कर रहा है।
सदन से दी गई है मंजूरी
इस प्रस्ताव को सदन ने मंजूरी दी है। यह एमसी की जमीन नहीं है। सिर्फ एनओसी के लिए हमारे पास आई थी। 19 पार्षदों का विरोध दर्ज कर लिया गया है। नगर निगम के एरिया में आने वाले क्षेत्र में जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर एमसी से एनओसी जरूरी होती है। - कुसुम सदरेट, नगर निगम महापौर
मामले की जांच करेंगे
यह प्रस्ताव जब पारित हुआ तब मैं सदन का हिस्सा नहीं था। अब संस्था को एनओसी देने के मामले में पार्षदों ने विरोध दर्ज करवाया है। कानूनी तौर पर इसका अध्ययन करेंगे कि सदन से पारित प्रस्ताव पर क्या किया जा सकता है। मामले की जांच होगी। - पंकज राय, नगर निगम आयुक्त