रूट हो रहे प्रभावित, लोग परेशान
स्पेयर पार्ट्स की कमी, बैटरियां खराब होने से नहीं हो पा रही मरम्मत
वार्षिक मरम्मत के टेंडर की प्रक्रिया नहीं चढ़ रही सिरे
बसों की खराबी से बढ़ी लोगों की दिक्कतें, रूट फेल होने से परिवहन सुविधाओं से महरूम लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में चलने वाली कई इलेक्ट्रिक बसें कई महीनों से सड़कों के किनारे धूल फांक रही हैं। इसकी वजह स्पेयर पार्ट्स की कमी और बैटरियों की खराबी है। हैरानी की बात यह है कि महीनों बीतने के बाद भी निगम प्रबंधन की ओर से बसों की मरम्मत का कार्य नहीं किया जा रहा है।
इस कारण शिमला समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों को बसों की कमी से जूझना पड़ रहा है। एचआरटीसी लोकल डिपो में 70 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जिनमें से 20 बसें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इलेक्ट्रिक बसों की एक बैटरी की कीमत लाखों रुपये में होती है। इसी वजह से लंबे समय से नई बैटरियों की खरीद नहीं हो पाई है। बसों की कमी के कारण शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कई रूट भी प्रभावित हो रहे हैं।
एचआरटीसी प्रबंधन के अनुसार 20 इलेक्ट्रिक बसों की वार्षिक मरम्मत (एएमसी) के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे, लेकिन इस कार्य के लिए कोई भी कंपनी आगे नहीं आ रही है। इस कारण एएमसी की प्रक्रिया लंबित होती जा रही है।
लोकल डिपो से हर रोज हजारों लोग एचआरटीसी बसों से आवाजाही करते हैं। बसों की मरम्मत में हो रही देरी के कारण लोगों को परिवहन सुविधाओं के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
200 बसें, 296 रूट, आए दिन खराब हो रहीं बसें
एचआरटीसी लोकल डिपो से 296 रूटों पर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। इनमें शहर के अलावा आसपास के दूरदराज के क्षेत्र भी शामिल हैं। बसों के आए दिन खराब होने और 20 इलेक्ट्रिक बसों के लंबे समय से बंद रहने के कारण इन रूटों के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। कई रूट फेल होने से लोगों को आवाजाही में खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं 15 साल की मियाद पूरी कर चुकी बसों को भी बंद किया जा रहा है। इससे एचआरटीसी के लिए रूट संचालन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके अलावा खटारा बसें आए दिन बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे सवारियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
इलेक्ट्रिक बसों की एएमसी के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे, लेकिन अभी तक कोई भी कंपनी इस कार्य के लिए आगे नहीं आई है। प्रबंधन बसों के मरम्मत कार्य के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
-निपुण जिंदल, प्रबंध निदेशक, एचआरटीसी