पुलिस की सख्ती के बाद थानों में लग रही पंजीकरण करवाने के लिए लाइनें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल से कामगार
दस्तावेजों के अलावा स्थायी पद की मंगवाई जा रही रिपोर्ट अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पुलिस की सख्ती के बाद जिले में अभी तक 18,053 प्रवासी कामगारों ने पुलिस थाने और चौकियों में जाकर अपना पंजीकरण तथा सत्यापन करवा लिया है।
रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और नेपाल से भारी संख्या में लोग रह रहे हैं। यह लोग सेब के बगीचों, निर्माण कार्य, पेशेवर कामगार के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण और सत्यापन नियमित प्रक्रिया है लेकिन मकान मालिक और ठेकेदार इसको लेकर संजीदा नहीं हैं। इस वजह से पुलिस को बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी लोगों का रिकॉर्ड एकत्रित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
हाल ही में संजौली मस्जिद में कथित अवैध निर्माण का मामला सामने आने के बाद प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण का मुद्दा उठा था। इसके बाद पुलिस ने निर्देश दिए थे कि मकान मालिक और ठेकेदार अपने पास रहने वाले बाहरी राज्यों से आए मजदूरों का पंजीकरण नहीं करवाएंगे तो उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 233 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने पर छह महीने की सजा और पांच हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके बाद प्रवासी कामगारों का पंजीकरण बढ़ा है। हालत यह है कि कई पुलिस स्टेशनों में पंजीकरण करवाने के लिए प्रवासी कामगारों की कतार लग रही हैं। इससे एक महीने के भीतर ही 18 हजार से अधिक लोगों का पंजीकरण हो गया।
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कोट
निर्माण कार्य में अहम भूमिका निभा रहे प्रवासी कामगार
जिले में नेपाल समेत बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूर पांच हजार करोड़ रुपये सेब की आर्थिकी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बगीचों में प्रवासी मजदूर ही रखरखाव और मजदूरी का कार्य करते हैं। इसके अलावा भवन निर्माण में इनकी अहम भूमिका है।
कोट
जिले में अभी तक बाहरी राज्यों से आने वाले 18,053 लोगों का पंजीकरण हो चुका है। इसके अलावा नियमित रूप से यह प्रक्रिया जारी है। बाहरी राज्यों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग जिले में मजदूरी समेत विभिन्न कार्य कर रहे हैं। -संजीव कुमार गांधी, एसपी शिमला