शहर में बिजली सैस दोगुना करने और शराब सैस पांच गुना बढ़ाने का नगर निगम का फैसला फिलहाल लागू नहीं होगा। दोनों प्रस्तावों को सरकार से मंजूरी न मिलने के कारण इन्हें अभी लागू नहीं किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि सरकार अभी सैस बढ़ाना नहीं चाहती। लोकसभा चुनाव के बाद ही इस पर फैसला लिया जा सकता है।
सैस बढ़ने से राजधानी में बिजली और शराब महंगी हो जाएगी। पिछले साल नगर निगम ने बिजली सैस प्रति यूनिट दस पैसे से बढ़ाकर 20 पैसे करने का फैसला लिया था। इससे निगम की मासिक कमाई 15 लाख से बढ़कर 30 लाख रुपये पहुंच जानी थी। निगम का दावा था कि यह पैसा बिजली बोर्ड से लिया जाएगा। काफी समय से निगम ने बिजली सैस नहीं बढ़ाया है। इसी तरह शराब की प्रति बोतल बिक्री पर लगने वाला सैस भी दो रुपये से बढ़ाकर दस रुपये करने का फैसला लिया गया था। अंतिम मंजूरी के लिए दोनों ही प्रस्तावों की फाइलें सरकार को भेजी गई, लेकिन अब तक इन्हें मंजूरी नहीं दी गई है। दोनों प्रस्तावों को मंजूरी मिलने का मतलब है कि उपभोक्ताओं की जेब ढीली होगी।
शहर के जंगल भी नहीं मिले
इससे पहले भाजपा शासित नगर निगम शहर के जंगल भी अपने अधीन लेने का प्रयास कर चुका है। बाकायदा सदन से प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा जा चुका है। लेकिन सरकार अभी इस पर फैसला नहीं दे रही। जंगल सरकार के अधीन होने से शहर में खतरनाक पेड़ों को कटवाने के लिए वन विभाग और सरकार से अनुमति लेनी पड़ रही है। यही नहीं, गिरे पेड़ भी निगम खुद नहीं हटा सकता।
सरकार से मंजूरी का इंतजार
नगर निगम सदन से दोनों प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजे हैं। अंतिम मंजूरी सरकार ही देती है। सरकार के जो भी निर्देश होंगे, वही लागू किए जाएंगे। - पंकज राय, नगर निगम आयुक्त