आईजीएमसी में डेंगू से पीड़ित 12 साल की बच्ची दाखिल
सोलन से किया है रेफर, चल रहा उपचार, हालत स्थिर
शिमला में नहीं आया अभी तक कोई मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में डेंगू के मरीजों की दस्तक शुरू हो गई है। अस्पताल में हाल ही में सोलन से रेफर 12 साल की बच्ची का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची की हालत स्थिर है। चिकित्सकों ने इस मौसम में एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अभी शिमला में इस तरह का मामला सामने नहीं आया है।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में रोजाना हजारों की तादाद में बुखार और अन्य अन्य समस्या से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। लक्षण दिखने के बाद चिकित्सक डेंगू का टेस्ट भी करवा रहे हैं। लेकिन अभी तक शिमला में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। शनिवार देर शाम एक 12 साल की बच्ची को सोलन से आईजीएमसी के लिए रेफर किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि सोलन, बद्दी और नालागढ़ के लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
एडीज मच्छर के काटने से होता है डेंगू
डॉक्टरों का कहना है कि एडीज नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से यह बीमारी होती है। इस मच्छर के काटने पर विषाणु तेजी से मरीज के शरीर में असर दिखाते हैं। इस कारण तेज बुखार और सिरदर्द होता है। इसे हड्डी तोड़ बुखार या ब्रेक बोन बुखार भी कहा जाता है। डेंगू होने पर मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है। इससे कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है।
डेंगू की पहचान और लक्षण
डेंगू के लक्षण तीन से चौदह दिन बाद दिखते हैं। इसमें तेज ठंड और बुखार होता है। वहीं सिर और आंखों में भी दर्द हो जाता है। इसके अलावा शरीर और जोड़ों में दर्द रहता है। चमड़ी के नीचे लाल धब्बे होना और जी मिचलाना, उल्टी तथा दस्त होना इसके लक्षण हैं। इस बीमारी के होने पर भूख भी कम होने लगती है। स्थिति गंभीर होने पर आंखों और नाक से खून आ जाता है। इससे व्यक्ति शॉक में चला जाता है, डेंगू शॉक भी कहा जाता है। हालांकि तब होगा जब प्लेटलेट्स दस हजार से कम हो जाएगा।
पहाड़ों में नहीं होता डेंगू वाला मच्छर: डॉ. उष्येंद्र
आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उष्येंद्र शर्मा ने कहा कि शिमला में डेंगू फैलने की संभावना काफी कम है। यह मच्छर ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में अब तक शिमला का कोई भी मरीज अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित नहीं पाया गया है। हालांकि, उन्होंने बताया कि उपचार के लिए आए मरीजों को इस दौरान चिकित्सीय परामर्श के बाद दवाई दी जाती है। इसके अलावा ग्लूकोज, आराम, ताजे फल और संतुलित आहार का सेवन करते रहना चाहिए।