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बिना शारीरिक शिक्षकों के 10719 प्राइमरी स्कूल

Mon, 16 Jun 2014 04:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सुंदरनगर (मंडी)
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर भले ही बड़े -बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन प्राइमरी स्कूलों में होने वाली खेल गतिविधियों पर सरकारें गंभीर नहीं हैं। न ही शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों के पद सृजित नहीं किए हैं।
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यह खुलासा सुंदरनगर के भयारटा निवासी सुरेश कुमार की ओर से सूचना का अधिकार के तहत प्रारंभिक शिक्षा विभाग से मांगी गई सूचना में हुआ है। सरकारी स्कूलों मेें पढ़ रहे बच्चों के सर्वांगीण विकास के सरकार के दावे हवा होते दिख रहे हैं। खेल गतिविधियां करवाने पर सरकार हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है।

ऐसे में खेल गतिविधियों का आयोजन प्राथमिक स्कूलों में महज औपचारिकता बनकर रह गया है। प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में 1996-97 से खेल प्रतियोगिताएं करवाई जा रही हैं। करीब 17 वर्ष बाद भी विभाग की ओर से शारीरिक शिक्षकों के पद सृजित नहीं किए गए हैं।
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स्कूलों में पढ़ाने वाले जेबीटी को ही यह जिम्मेवारी सौंपी जाती है। इन्हें खेल नियमों के बारे में एक शारीरिक शिक्षक की अपेक्षा जानकारी कम होती है। गत वर्ष प्राइमरी स्कूलों में करीब 60.77 लाख की राशि खेल गतिविधियों पर बिना शारीरिक शिक्षकों के खर्ची गई।

प्रदेश के 12 जिलों में 31 दिसंबर, 2013 तक 10719 प्राइमरी स्कूल हैं। बिलासपुर में 602, चंबा 1141, हमीरपुर 507, कांगड़ा 1716, किन्नौर 193, कुल्लू 764, लाहौल-स्पीति 209, मंडी 1716, शिमला 1609, सिरमौर 999, सोलन 766 तथा ऊना में 497 प्राइमरी स्कूल हैं।

उधर, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हंसराज शर्मा ने  प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षा अध्यापक न होने की पुष्टि की है। कहा कि प्राइमरी स्कूलों की खेलकूद प्रतियोगिताएं प्रतिवर्ष करवाई जाती हैं। इसके लिए सरकार बजट मुहैया करवाती है। खेल गतिविधियाें का जिम्मा स्कूलों मेें कार्यरत जेबीटी को सौंपा जाता है।
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