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'पीरियड में खाना बनाने वाली महिलाएं कुत्री में लेंगी जन्म' कहने वाले स्वामी को Period Feast से जवाब

Wed, 26 Feb 2020 12:50 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Period Feast - फोटो : ANI
मासिक धर्म यानी पीरियड को लेकर अभी भी देश के कई हिस्सों में लोगों की सोच संकीर्ण है। अभी पिछले दिनों स्वामी कृष्णास्वरूप दास ने ये कह डाला कि 'जो महिलाएं पीरियड के समय खाना बनाती हैं वो अगले जन्म में कुतरी (फीमेल डॉग) बनकर पैदा होती हैं और जो पुरुष पीरियड वाली महिलाओं के हाथ का बना खाना खाते हैं वो अगले जन्म में बैल बनकर पैदा होते हैं।' उनके इस बयान का देश भर में विरोध हुआ। वहीं राजधानी दिल्ली की महिलाओं ने उन्हें अलग ही अंदाज में जवाब दिया।
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Period Feast, Delhi - फोटो : ANI
यह ऐसा इकलौता मामला नहीं है, जब महिलाओं के पीरियड को लेकर ऐसी दकियानुसी बातें कही गई हों। पिछले साल झारखंड के एक आदिवासी इलाके में एक महिला को पीरियड के दौरान एक फूस के घर में कैद कर दिया गया था। वहीं हाल ही में गुजरात के भुज शहर में श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट के 68 लड़कियों से पीरियड के बारे में सवालात हुए। हॉस्टल के वार्डन को संदेह था कि कुछ लड़कियां पीरियड के दौरान किचन में गई हैं। यह संस्थान भी स्वामी कृष्णास्वरूप द्वारा ही संचालित किया जाता है। 
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Period Feast - फोटो : ANI
इन तमाम दकियानुसी घटनाओं को दिल्ली की एक एनजीओ ने अलग ही अंदाज में जवाब दिया है। दरअसल एनजीओ सच्ची सहेली की ओर से पीरियड फीस्ट का आयोजन कराया गया। 23 फरवरी को हुए इस उत्सव में उन 28 महिलाओं से खाना बनवाया गया, जिनका पीरियड चल रहा था। उनके हाथों बना खाना खाने के लिए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित करीब 300 लोग पहुंचे। 
 

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Period Feast, Delhi - फोटो : ANI
इस एनजीओ की फाउंडर गायनिकोलॉजिस्ट और सुरभि सिंह के मुताबिक ये महिलाओं के मासिक धर्म के सम्मान में आयोजित एक लंच इवेंट था। गुजरानी के स्वामीनारायण भुज मंदिर के स्वामी कृष्णास्वरूप की रूढ़िवादी सोच को हमारी ओर से करारा जवाब था। इस इवेंट में महिलाओं ने एक एप्रेन पहना था जिसमें लिखा था, 'मैं गर्व करती हूं कि मुझे मासिक धर्म है'। 
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Period Feast - फोटो : ANI
इस इवेंट के दौरान एक स्ट्रीट प्ले के जरिए पीरियड से जुड़े मिथकों और अंधविश्वासों के बारे में जागरूकता फैलाई गई। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज के समय में शुद्ध और अशुद्ध कुछ भी नहीं है। मासिक धर्म तो प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। 
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