भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के लगभग सभी समाजों में पुरषों की प्रधानता पाई जाती है क्योंकि पुरषों को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पुरुष अपनी शक्ति एवं श्रेष्ठता को एक गलत सन्दर्भ में ले कर अपने आप को महिलाओं से अधिक मानने लगे हैं। इस ही को सिद्ध करने के लिए वे महिलाओं पर अत्याचार करते हैं। यही कारण है की महिलाएं कमजोर ही रहीं हैं और उनके अधिकारों को तवज्जो कम दी जाती है।आज तक हमारे समाज की महिलाओं को हिंसात्मक व्यहवार एवं शारीरिक व मानसिक अत्याचार सहना पड़ा है लेकिन अब समाज में ऐसी कई महिलाआएं हैं जो एक दुसरे के हक के लिए खड़ी होती हैं। ऐसी ही एक महिला उत्तर प्रदेश के उन्नाव में दूसरी महिलाओं के हक़ की लड़ाई लड़ रही है।
उन्नाव में घरेलू व सामाजिक उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की आवाज़ बनने वालीं शिखा अब तक पांच सौ से अधिक महिलाओं को न्याय दिला चुकी हैं। इसके लिए उन्होंने एक टीम भी बनाई है, जो पीड़ित महिलाओं की सूचना पर उनके पास पहुंचती हैं और समस्या का समाधान करती हैं।
शुक्लागंज निवासी शिखा सिकन्दर पुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय नयाखेड़ा में सहायक शिक्षिका हैं। वह बचपन से ही महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करने की इच्छुक थीं। शैक्षिक करियर के दौरान कई जागरूकता अभियान का भी हिस्सा बनीं। पढ़-लिखकर शिक्षक बनीं तो दूसरी महिलाओं, बालिकाओं को जागरूक किया। उन्होंने उन महिलाओं की मदद की जो घरेलू उत्पीड़न का शिकार होती हैं। महिलाओं को बताया कि वह कैसे न्याय पा सकती हैं। शिखा ने ऐसी मजबूर महिलाओं की आवाज़ जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाई। इसके अलावा कई मंचों के माध्यम से बालिका एवं महिला शिक्षा के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया।
गरीब बस्तियों का दौराकर महिलाओं से बात की। उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी दी। बालिकाओं तथा महिलाओं के रक्षण के लिए एकांकी लिखी। उनकी लिखी एकांकी पर बच्चों ने अभिनय किया, जिसे जिले में प्रथम पुरस्कार भी मिला। मलिन बस्तियों में बालिकाओं को कठिन दिनों में स्वच्छता के बारे में बताया। उन्होंने सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी आपातकालीन हेल्पलाइन फोन नंबरों की भी जानकारी दी। स्कूल के बच्चों को बालिका शिक्षा के बारे में प्रेरित करने वाले गीत सिखाए।
शिखा का मानना है की जो स्तर हमारे समाज ने पुरषों को दिया है वही महिलाओं को भी मिलना चाहिए और भेद भाव की भावना नहीं होनी चाहिए।