ये हैं मुंबई की आरिया गुप्ता, जो बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए ऐसे जुटा रहीं पैसे
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आज कल छोटे-छोटे बच्चों में भी दुसरे की मदद करने की भावना जाग रही है। हर दुसरा बच्चा चाहता है की वो इतना सक्षम बन सके की दुसरे इंसान की मदद कर सके। वंचित वर्ग के प्रति बच्चों की सहानुभूति भी देखने को मिल रही है। बच्चे ये कोशिश कर रहे हैं की वे किसी न किसी तरीके से वंचित वर्ग के लोगो की मदद कर सकें। ये मदद सिर्फ पैसो से ही नहीं बल्कि उनको पढाई में सहायता कर के भी की जा रहो है।
इस कोरोना महामारी के दौरान बहुत नुक्सान पहुंचा है। आर्थिक स्तिथि को तो हानि हुई ही है उस ही के साथ अपनों को खोने का दर्द भी लोगों ने सहा है। स्कूल बंद होने के कारण सारे बच्चों की पढाई ऑनलाइन हो गयी है। जो बच्चे लैपटांप या महंगे मोबाइल फ़ोन पर नहीं खर्चा कर सकते, उनकी पढाई का बहुत हर्जा भी हो रहा था, इस ही कारण से सत्रह वर्षीय आरिया ने एक कदम उठाया आज कल छोटे-छोटे बच्चों में भी दूसरों की मदद करने की भावना जाग रही है। हर दूसरा बच्चा चाहता है की वो इतना सक्षम बन सके की दुसरे इंसान की मदद कर सके। वंचित वर्ग के प्रति बच्चों की सहानुभूतिं भी देखने को मिल रही है। बच्चे ये कोशिश कर रहे हिन् की वे किसी न किसी तरीके से वंचित वर्ग के लोगो की मदद कर सकें। ये मादा सिर्फ पैसो से ही नहीं बल्कि उनको पढाई में सहायता करके भी की जा रहो है।
इस कोरोना महामारी के दौरान बहुत नुक्सान पहुंचा है। आर्थिक स्तिथि को तो हानि हुई ही है उस ही के साथ अपनों को खोने का दर्द भी लोगों ने सहा है। स्कूल बंद होने के कारण सारे बच्चों की पढाई ऑनलाइन हो गयी है। जो बच्चे
सत्रह साल की आरिया गुप्ता मुंबई के धारावी में रहने वाले 15 बच्चों की ऑनलाइन एजुकेशन के लिए फंड जुटाने में लगी हैं। वे चाहती हैं कि इन बच्चों के पास भी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए टैबलेट हो ताकि बिना किसी परेशानी के उनकी पढ़ाई हो सके। वे श्री श्री रविशंकर विद्या मंदिर में स्टूडेंट्स की मेंटर हैं और धारावी में रहने वाले बच्चों के लिए क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म इम्पैक्टगुरु के माध्यम से डेढ़ लाख जमा करना चाहती हैं। उन्होंने अपने लक्ष्य का 80% अमाउंट जमा भी कर लिया है। आरिया आदित्य बिड़ला वर्ल्ड एकेडमी में 12 वीं कक्षा की स्टूडेंट हैं। दो साल पहले धारावी के बच्चों को रोबोटिक्स पढ़ाते हुए उसने ये महसूस किया कि अशिक्षा और गरीबी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
आरिया के अनुसार एक साल पहले इन बच्चों से बातचीत करने के दौरान उनके संघर्ष, जिंदगी और आसपास के माहौल को करीब से जानने का मौका मिला। उन्होंने ये जाना कि यहां रहने वाले कई बच्चों के लिए आज भी शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं है। वे हर हाल में पढ़ना चाहते हैं लेकिन सुविधाओं की कमी के चलते उनकी पढ़ाई का सपना अधूरा ही रह जाता है। महामारी के बीच लॉकडाउन में इन बच्चों के माता-पिता के पास काम नहीं था। आर्थिक तंगी के चलते उनके लिए अपने बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए मोबाइल खरीदना भी मुश्किल है।