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Hirabai Lobi: 700 से ज्यादा महिलाओं और बच्चों का संवारा जीवन, जानें पद्मश्री हीराबाई लोबी के बारे में

Mon, 10 Jul 2023 06:26 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हीराबाई ने रेडियो से ज्ञान अर्जित किया। रेडियो पर जैविक खाद बनाने के तरीके के बारे में सुना और इस दिशा में काम करना शुरू किया। 
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हीराबाई लोबी - फोटो : Twitter
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विस्तार
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Padma Shri 2023 Hirabai Ibrahim Lobi Biography : गणतंत्र दिवस 2023 की पूर्व संध्या को पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई। 106 पद्म पुरस्कार सम्मानित लोगों की सूची में 19 महिलाओं का नाम शामिल है। इन महिलाओं में कई ऐसे नाम है जो बहुत प्रसिद्ध हैं, जैसे लेखिका सुमन मूर्ति, सुधा कल्याणम और अभिनेत्री रवीना टंडन। इसी तरह अन्य पद्म पुरस्कार सम्मानित महिलाएं भी हैं जो महिला सशक्तिकरण की प्रतीक हैं। इन्हीं महिलाओं में गुजरात के सिद्दी समाज की एक महिला का नाम भी शामिल किया गया है। यह महिला सिद्दी समाज और महिला उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में प्रयासरत हैं, और इस मार्ग में उनके सामने खुद उनकी शिक्षा या अन्य कमियां रुकावट नहीं बन पाईं। यह गुजरात के सिद्दी समाज की हीराबाई लोबी हैं जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। आइए जानते हैं हीराबाई लोबी की उपलब्धियों के बारे में।

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हीराबाई लोबी की जीवन परिचय

पद्मश्री सम्मानित हीराबाई लोबी गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के तलाला तहसील में स्थित जांबुर गांव की रहने वाली हैं। अफ्रीकी मूल के सिद्दी समाज की सदस्य हीराबाई लोबी के ऊपर से माता पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। उनका पालन पोषण दादी ने ही किया।

हीराबाई लोबी की शिक्षा

हीराबाई लोबी ने कोई बुनियादी शिक्षा हासिल नहीं की, न ही वह स्कूल और कॉलेज गईं।लेकिन वह सीखने का जुनून रखती थीं। उन्होंने जो सीखा अपने आसपास के माहौल से सीखा। रेडियो से ज्ञान अर्जित किया। रेडियो पर जैविक खाद बनाने के तरीके के बारे में सुना और इस दिशा में काम करना शुरू किया। रेडियो ने उनके ज्ञानवर्धन में काफी योगदान दिया। रेडियो पर आने वाले सरकारी योजनाओं, विकास कार्यक्रमों को हीराबाई सुना करती और दूसरों को भी बताती थीं।
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हीराबाई की शादी और परिवार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हीराबाई की शादी कम उम्र में हो गई थी। महज 14 वर्ष की आयु में शादी होने के बाद भी उनकी जिज्ञासाएं, सीखने का जुनून कम नहीं हुआ। वह नई जानकारियां प्राप्त करती रहती, इसके लिए वह गांधीनगर सचिवालय के चक्कर लगाया करतीं।

700 महिलाओं और बच्चों का बदला जीवन

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इस प्रयास में उन्हें कई कठिनाइयों और विरोध का भी सामना करना पड़ा। लेकिन हीराबाई ने उनके जैसी महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की ठान ली थी। वह सिद्दी समाज की महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाना चाहती थीं। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने कई कदम उठाएं। परिणाम स्वरूप 700 से अधिक महिलाओं और बच्चों के जीवन में हीराबाई बदलाव लेकर आईं।

कई सम्मान अब तक मिले

महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उन्होंने महिलाओं के बैंक अकाउंट खुलवाएं और उन्हें रोजगार दिलाने की भी कोशिश की। वर्ष 2004 में हीराबाई लोबी ने महिला विकास फाउंडेशन की स्थापना की। उनके प्रयासों के लिए हीराबाई लोबी को रिलायंस रियल अवार्ड, जानकी देवी प्रसाद बजाज अवार्ड और कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
 
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