Tabitha Babbitt Biography in Hindi: आज लकड़ी को काटकर एक खूबसूरत फर्नीचर का शक्ल देने में ज्यादा समय नहीं लगता। लड़की घर या किसी इमारत के खूबसूरत इंटीरियर से लेकर फर्नीचर तक को बेहद क्लासी बना सकती है। लड़की से किसी भी चीज को बनाना आज भले ही बहुत आसान है लेकिन एक दौर ऐसा था जब किसी लकड़ी को काटने के लिए दो लोग मिलकर घंटों आरी चलाते थे।
आरी से लकड़ी काटने में बहुत अधिक मेहनत लगने के साथ ही समय भी अधिक व्यय होता है। घंटों बीतने के बाद भी काम कम ही होता था। लेकिन 1813 में एक ऐसी मशीन तैयार की गई, जिसके जरिए लकड़ी को काटना बेहद आसान हो गया।
लकड़ी काटने के लिए बनी पहली मशीन
यह मशीन मानव शक्ति से नहीं, बल्कि पानी की ताकत से चलती थी। इससे लकड़ी की कटाई में कम समय लगने लगा और मेहनत भी नहीं लगती। इस मशीन का निर्माण करने वाली एक महिला थी। आइए जानते हैं लकड़ी काटने वाली मशीन का निर्माण करने वाली महिला तबिता बेबबिट के बारे में।
तबिता बेबबिट नाम की महिला ने किया सर्कुलर सॉ का निर्माण
सन् 1813 में अमेरिका के मैसाचुसेट्स में रहने वाली तबिता बेबबिट ने एक ऐसी मशीन तैयार की, जो मानव शक्ति की जगह पानी की ताकत से चलती थी। इस मशीन का नाम सर्कुलर सॉ था। इस मशीन को बनाने के लिए तबिता ने एक गोलाकार ब्लेड को आरी की तरह आकार दिया और उसे एक चौड़ी मेज पर लड़की तथा लोहे के फ्रेम की मदद से इस तरह लगाया कि उस पर लकड़ी रखने की जगह बन सके।
कैसे काम करती थी सर्कुलर सॉ
मशीन से लकड़ी की कटाई आसान हो गई। इसमें दो व्यक्तियों को सिर्फ लकड़ी के बड़े से लट्ठे को आगे की ओर खिसकाना होता था। गोलाकार ब्लेड पानी की ताकत से घूमता था और लड़की कट जाती थी। खास बात यह है कि इस मशीन को बनाने वाली तबिता बेबबिट कभी स्कूल नहीं गईं और उन्होंने अपने आविष्कार को कभी पेटेंट भी नहीं कराया।
तबिता बेबबिट अपने कस्बे के एक समूह हार्वर्ड शेकर कम्युनिटी की सक्रिय सदस्य थीं। यह समूह आज भी हार्डविक में मौजूद है। शेकर कम्युनिटी के अखबार में तबिता की बनाई मशीन के बारे में विस्तार से जानकारी प्रकाशित की जा चुकी है।