आईएएस बनने की मिली राह
श्रीधन्या ने आईएएस बनने की ठान ली और पढ़ाई शुरू कर दी। इसके लिए शुरुआत में उन्होंने ट्राइबल वेलफेयर के सिविल सेवा प्रशिक्षण केंद्र द्वारा चलाई जा रही कोचिंग ज्वाइन की। बाद में तिरुवनंतपुरम में जाकर पढ़ाई की। उनकी पढ़ाई के लिए अनुसूचित जनजाति विभाग ने वित्तीय सहायता भी दी।
श्रीधन्या सुरेश अपने पहले प्रयास में सफल न हो सकीं। उन्होंने अधिक तैयारी के साथ दोबारा कोशिश की लेकिन यूपीएससी की परीक्षा क्लीयर नहीं कर पाईं। इसके बाद भी श्रीधन्या ने हार नहीं मानी। कड़ी मेहनत और परिश्रम से तीसरे प्रयास में साल 2018 में यूपीएससी की परीक्षा को श्रीधन्या ने पास कर लिया। उनकी ऑल इंडिया रैंक 410 रही। इंटरव्यू की लिस्ट में नाम आ गया।
इंटरव्यू में जाने के लिए दोस्तों ने दिए पैसे
श्रीधन्या ने यूपीएससी की लिखित परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन साक्षात्कार के लिए उन्हें दिल्ली जाना था। उस वक्त श्रीधन्या और उनके परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि दिल्ली भेज सकें। हालांकि श्रीधन्या के दोस्तों को जब इस बात की जानकारी हुई तो सभी ने चंदा मिलाकर 40 हजार रुपये एकत्र किए और श्रीधन्या को दिल्ली भेजा। परिवार और दोस्तों की उम्मीदों पर श्रीधन्या खरी उतरी और इंटरव्यू पास करके केरल की पहली आदिवासी अफसर बन गईं।