बच्चों में डिप्रेशन की समस्या (सांकेतिक)
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कम उम्र में ही बच्चों के डिप्रेशन का शिकार होना, मौजूदा समय की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके लिए कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। कोरोना जैसी महामारी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। बच्चों को ऐसे ही समस्याओं से मुक्त कराने के लिए 17 साल की अर्शिया गौड़ ने बड़ा अभियान छेड़ रखा है। अर्शिया, देशभर में छोटे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैला रही हैं। इतना ही नहीं वह पढ़ाई-लिखाई से वंचित बच्चों की मदद करके उनके जीवन को नई दिशा देने का भी प्रयास कर रही हैं। बच्चों का भविष्य, सुविधाओं की कमी में खराब न हो जाए, इसके लिए प्रयासरत अर्शिया धनराशि इकट्ठा करके ऐसे ही जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए प्रयास में जुटी हैं।
खुद भी रह चुकी हैं अवसाद का शिकार
अर्शिया खुद बचपन में डिप्रेशन का शिकार रह चुकी हैं। बचपन में अधिक वजन होने के कारण बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे। इस समस्या ने उनकी दिमाग पर इतना गंभीर असर डाला कि वह काफी परेशान रहने लगीं और एक समय के बाद वह डिप्रेशन की शिकार हो गईं। ऐसी समस्या किसी और को न झेलनी पड़े इसी को लेकर अर्शिया लगातार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैला रही हैं। अर्शिया कहती हैं, आमतौर पर इस तरह की समस्या पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है, लेकिन यह बेहद ही गंभीर विषय है।