फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टोक्यो ओलंपिक में महिलाओं का बोल बाला: कठिनाइयों भरा रहा है मीराबाई चानू और लवलीना का सफर, पीछे छुपी है कड़ी मेहनत

Fri, 30 Jul 2021 12:45 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टोक्यो ओलंपिक 2021 में पहले वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने देश को पहला पदक दिलाकर विश्व भर में भारत का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया, तो वहीं अब बॉक्सर लवलीना ने भी ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है।

लवलीना ने चीन ताइपे की चिन चेन को 4-1 से हराकर इस मेडल को पक्का किया है। इसी के साथ भारत को मिलने वाला ये दूसरा पदक होगा।
विज्ञापन
मीरबाई चानू और बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन - फोटो : PTI and social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की महिलाएं आगे बढ़ रही है, वे अब पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नहीं बल्कि उनसे भी आगे निकल रही हैं। वे घर संभालती हैं, परिवार को देखती हैं, हर दुख-तकलीफ का सामना करते हुए अपना जीवन बसर करती हैं, लेकिन कभी किसी से शिकायत नहीं करती हैं। उनकी नजर सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य पर होती है। वे किसी से शिकायत करके, किसी बात में उलझकर अपना समय खराब नहीं करतीं बल्कि वे अपने समय का सही उपयोग करके आगे बढ़ती रहती हैं और इसका जीता-जागता उदाहरण आज हमारे सामने टोक्यो ओलंपिक 2021 से सामने आ रहा है। जहां पहले मीरा बाई चानू ने देश को पहला पदक दिलाया, तो वहीं अब बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन भी देश के लिए अपना पदक पक्का कर चुकी हैं। ऐसे में महिलाओं ने ये एक बार फिर से बता दिया कि वे किसी भी मामले में बाकी लोगों से कम नहीं हैं।
विज्ञापन


बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को खेले गए एक तरफा मुकाबले में चीन ताइपे की निएन चिन चेन को 4-1 से मात दे दी। लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है। दरअसल, बात ये है कि लवलीना पहली बार ओलंपिक में उतरी हैं और पहली बार में ही अपने नाम ब्रॉन्ज मेडल पक्का करके उन्होंने ये बता दिया की ये तो उनकी सिर्फ शुरूआत है।

लवलीना बोरगोहेन - फोटो : सोशल मीडिया
वहीं, लवलीना बोरगोहन विश्व चैंपियनशिप में दो कांस्य और एशियाई चैंपियनशिप में एक बार कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी हैं। लवलीना की उम्र भले ही 23 साल है, लेकिन उनके इरादे साफ हैं। असम के एक छोटे से गांव से उन्होंने टोक्यो ओलंपकि तक का सफर तय किया है। यहां आपको बताते चलें कि लवलीना असम के गोलाघाट जिले के सरूपथर विधानसबा के छोटे से गांव बरोमुखिया की रहने वाली हैं। लेकिन क्या फर्क पड़ता है कि वे गांव से आती हैं या किसी बड़े शहर से, क्योंकि उनका इरादा तो साफ है कि वे देश के लिए मेडल लाना चाहती हैं और देश का गर्व से सीना चौड़ा करना चाहती हैं।
विज्ञापन

मीराबाई चानू - फोटो : PTI
इससे पहले देश को उस समय गर्व महसूस हुआ, जब मीरा बाई चानू ने 49 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। बात यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहां से शुरू होती है। मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला और एकमात्र वेटलिफ्टर हैं। लेकिन यहां ये समझना जरूरी है कि उन्होंने इस पदक को पाने के लिए कितनी मेनहत की। उन्होंने बता दिया कि अगर मेहनत सच्ची है तो फल मीठा जरूर होगा।

मीरबाई ने कड़ी मेहनत की, अपने खानपान पर विशेष ध्यान दिया और काफी ज्यादा और कठिन वर्कआउट किया। मीराबाई चानू ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने अपना वजन बढ़ने के डर की वजह से टोक्यों ओलंपिक में दो दिनों तक कुछ भी नहीं खाया। उन्होंने ये भी कहा कि ये बहुत मुश्किल भरा रहा। हमें इस श्रेणी में वजन बनाए रखने के लिए अपनी डाइट पर सख्ती से कंट्रोल की जरूरत थी। इसलिए मैं जंक फूड नहीं खा सकती थीं।

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में ही नहीं, बल्कि भारत का नाम विश्व पटल पर गर्व से ऊंचा कर दिया है। साथ ही उन्होंने तिरंगे की शान भी बढ़ाई है। हर भारतीय को दोनों खिलाड़ियों पर गर्व है और अब इंतजार है कि मीराबाई चानू की तरह ही लवलीना भी अपना मेडल प्राप्त करें, जो वे पहले ही पक्का कर चुकी हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें