लता भगवान करे आज पूरे देश में मैराथन रनर के रूप में जानी जाती हैं। उनकी उम्र 68 साल है और वे महाराष्ट्र के बारामती जिले के एक गांव में रहती हैं। आज से कुछ सालों पहले तक उन्हें कोई नहीं जानता था लेकिन 2014 में जब उन्होंने मैराथन रेस में हिस्सा लिया और जीत हासिल की, तब से उन्हें सब जानने लगे हैं। उनपर एक मराठी फिल्म भी बन चुकी है। आइए जानते हैं लता भगवान करे से जुड़ी अन्य बातें।
बेटे की आय अधिक नहीं है
लता के पति बारामती जिले में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करते थे और वे लोगों के खेतों में काम किया करती थीं। उनके चार बच्चे हैं, जिनकी वे शादी करवा चुकी हैं। उनका एक ही बेटा है, जिसकी बहुत अधिक आय नहींं है।
करवाना थी एमआरआई
2014 में लता के पति भगवान की अचानक से तबीयत बहुत बिगड़ गई, जिसके लिए डॉक्टर ने एमआरआई करवाने को कहा। एमआरआई में पांच हजार का खर्च आने वाला था जो कि उनके पास नहीं थे। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह पति का इलाज करवाया जाए।
नंगे पैर जीत गईं रेस
जब उन्हें पता चला कि बारामती में मैराथन होने वाली है और जीतने वाले को 5,000 रुपए का इनाम मिलेगा। उस समय लता को गांव के बच्चों और कई सारे लोगों ने इस प्रतियोगिता में भाग लेने की सलाह दी। जब दौड़ शुरू हुई, तो कुछ देर बाद लता की चप्पलें टूट गईं, उसके बाद भी वे नंगे पैर ही बस भागती गईं और आखिर में रेस जीत ली। इनाम के रूप में मिली राशि से उन्होंने पता की जांच करवाई।