गंगा बड़ी गोदावरी, तीरथ बड़ी प्रयाग, सबसे बड़ी अयोध्या नगरी, जहां राम लिहिन अवतार। यह कहावत अयोध्या का महात्म्य बताती है, पर परिदृश्य अब तेजी से बदल रहा है। आस्था, पूजन और ग्रंथ लेखन से हटकर अयोध्या चहुंमुखी विकास के पथ पर अग्रसर है।
सरयू घाट अपने धार्मिक महत्व से परे लोगों को रोजगार देने के रूप में भी खुद को परिभाषित कर रहा है। पांच साल पहले तक सरयू घाट पर रोजाना 200 लोगों के हाथ में भी रोजगार नहीं था, अब दो हजार से अधिक परिवारों के जीवन में यही घाट मुस्कान बिखेर रहा है।
त्रिभुवन मिश्रा तीन साल से यहां नींबू चाय बेच रहे हैं। बताते हैं, पहले पांच-छह चाय वाले रहे होंगे और वह रोजाना 100 कप चाय बेच लेते थे। अब 100 से अधिक चाय वाले हैं और वह अकेले ही 250-300 कप चाय बेच लेते हैं। घाट पर पर्यटकों को घुमाने के लिए अब 15 गुना ज्यादा नावें हर वक्त तैयार रहती हैं। फल-प्रसाद, के साथ फास्ट फूड तक की दुकानें खुल गई हैं।
आर्थिक क्षेत्र में अयोध्या ने लगाई ऊंची छलांग
वहीं, आर्थिक क्षेत्र में अयोध्या ने ऊंची छलांग लगाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में 254 करोड़ रुपये का निर्यात किया है। वर्ष 2021-22 में 110 करोड़ का निर्यात हुआ था। 2022-23 में इसमें 150 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े के आधार पर इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।